The pride of Indian cinema: भारतीय फिल्म जगत, विशेषकर बंगाली सिनेमा के ‘बम्बा दा’ यानी प्रसेनজিৎ চট্টোপাধ্যায় के लिए यह वर्ष खुशियों की नई सौगात लेकर आया है। भारत सरकार ने उन्हें प्रतिष्ठित पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की है। यह सम्मान न केवल उनके तीन दशकों से अधिक के करियर की जीत है, बल्कि क्षेत्रीय सिनेमा को वैश्विक पहचान दिलाने के उनके अटूट प्रयास का परिणाम भी है।
एक कलाकार का सफर: ‘अमर संगी’ से ‘जुबली’ तक (The pride of Indian cinema)
प्रसेनজিৎ चटर्जी ने अपने करियर की शुरुआत एक बाल कलाकार के रूप में फिल्म ‘छोटो जिग्यासा’ से की थी। लेकिन 1987 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘अमर संगी’ ने उन्हें रातों-रात सुपरस्टार बना दिया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
कमर्शियल सिनेमा का दौर: एक समय ऐसा था जब बंगाल में सिनेमा का मतलब सिर्फ प्रसेनজিৎ होता था। उन्होंने दर्जनों मसाला और एक्शन फिल्में दीं, जिन्होंने इंडस्ट्री को आर्थिक रूप से मजबूती दी।
कलात्मक बदलाव: ऋतुपर्णो घोष की फिल्म ‘चोखेर बाली’ और ‘दोसर’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने अपनी छवि एक चॉकलेट बॉय हीरो से बदलकर एक संजीदा अभिनेता की बनाई।
राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पहचान: ‘शंखाचिल’, ‘मोनर मानुष’ और हाल ही में आई वेब सीरीज ‘जुबली’ में ‘श्रीकांत रॉय’ के उनके किरदार ने यह साबित कर दिया कि उनकी अदाकारी की कोई सीमा नहीं है।
पद्म सम्मान का महत्व
पद्म श्री पुरस्कार किसी भी नागरिक के लिए सर्वोच्च सम्मानों में से एक है। प्रसेनজিৎ के लिए यह पुरस्कार मिलने के कई मायने हैं:
कड़ी मेहनत का फल: उन्होंने उस दौर में बंगाली फिल्म इंडस्ट्री को संभाला जब वह पतन की ओर थी।
प्रेरणा: यह युवा क्षेत्रीय कलाकारों के लिए एक संदेश है कि यदि आप अपने काम के प्रति समर्पित हैं, तो पूरा देश आपको सराहेगा।
विविधता का सम्मान: यह सम्मान उनके द्वारा निभाए गए विविध किरदारों—एक प्रेमी से लेकर एक सख्त पिता और एक दूरदर्शी निर्माता—की पहचान है।
प्रशंसकों और उद्योग की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। टॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड तक के सितारों ने उनकी इस उपलब्धि पर गर्व जताया है। फैंस का कहना है कि “यह सम्मान बहुत पहले मिल जाना चाहिए था, लेकिन ‘देर आए दुरुस्त आए’।”
निष्कर्ष
प्रसेनজিৎ চট্টোপাধ্যায় केवल एक अभिनेता नहीं, बल्कि बंगाल की संस्कृति का एक अटूट हिस्सा हैं। पद्म श्री से सम्मानित होना उनके गौरवशाली सफर में एक नया और सबसे चमकीला अध्याय है। वे आज भी उसी ऊर्जा के साथ काम कर रहे हैं, जो उनकी पहली फिल्म में थी।
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