Electric Cab: राजधानी दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ जंग और ग्रीन मोबिलिटी (Green Mobility) को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी शुरुआत हुई है। दिल्ली में अब ऐप-आधारित एक नई इलेक्ट्रिक टैक्सी सर्विस ‘ग्रीन एसएम’ (Green SM) की एंट्री हो गई है। वियतनाम की इस मशहूर कंपनी की सर्विस सीधे तौर पर भारत में पहले से पैर जमा चुके ओला (Ola) और उबर (Uber) जैसे दिग्गजों को कड़ी टक्कर देने वाली है।
1,000 इलेक्ट्रिक टैक्सियों के साथ भव्य शुरुआत
शुक्रवार (5 जून) को दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजंदर सिंह सिरसा और परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने हरी झंडी दिखाकर इस पर्यावरण-अनुकूल टैक्सी सेवा (EV Taxi Service) का उद्घाटन किया।
इस खास मौके पर राजधानी की सड़कों पर 1,000 इलेक्ट्रिक टैक्सियों की एक विशाल रैली निकाली गई।
इसके साथ ही कंपनी ने ग्राहकों के लिए अपना आधिकारिक मोबाइल एप्लीकेशन (Mobile App) भी लॉन्च कर दिया है।
सरकार का संकल्प: प्रदूषण मुक्त दिल्ली
दिल्ली सरकार इस तरह के ‘हरित प्रयासों’ को लेकर बेहद उत्साहित है। उद्घाटन के दौरान मंत्रियों ने इसके फायदों को रेखांकित किया:
पर्यावरण मंत्री मनजंदर सिंह सिरसा ने कहा कि सरकार प्रदूषण कम करने और नागरिकों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इलेक्ट्रिफिकेशन की ओर बढ़ाया गया हर कदम एक स्वस्थ भविष्य का निर्माण करेगा।
परिवहन मंत्री पंकज सिंह के मुताबिक, दिल्ली की ‘ईवी पॉलिसी’ (EV Policy) के तहत ग्रीन मोबिलिटी शहर के ट्रांसपोर्ट सिस्टम का मुख्य आधार बन रही है। यह सर्विस न सिर्फ प्रदूषण घटाएगी बल्कि हवा की गुणवत्ता (Air Quality) में भी सुधार लाएगी।
ओला-उबर से सस्ता सफर! क्या है कंपनी का प्लान?
‘ग्रीन एसएम’ के अधिकारियों ने भारतीय बाजार के लिए अपने बड़े और महत्वाकांक्षी प्लान का खुलासा किया है:
10,000 टैक्सियों का लक्ष्य: कंपनी का इरादा अगले एक साल के भीतर दिल्ली और नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में 10,000 इलेक्ट्रिक गाड़ियां सड़कों पर उतारने का है।
किफायती किराया: आम जनता के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि कंपनी ने दावा किया है कि उनकी इलेक्ट्रिक टैक्सियों का किराया ओला और उबर के मुकाबले काफी कम और किफायती होगा।
निष्कर्ष
‘Green SM’ की इस एंट्री से दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों को न सिर्फ महंगे किराए से राहत मिलने की उम्मीद है, बल्कि बिना किसी कार्बन उत्सर्जन के सफर करने का एक बेहतरीन विकल्प भी मिलेगा। अब देखना यह होगा कि ओला और उबर इस नई और सस्ती चुनौती का सामना कैसे करते हैं।
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