Indian Railway:आजादी के दशकों बाद भी झारग्राम के सुदूर सीमावर्ती इलाकों के लिए ‘ट्रेन पकड़ना’ किसी कठिन युद्ध जीतने से कम नहीं था। लेकिन अब झारग्राम, लालगढ़, नयाग्राम और गोपीबल्लभपुर के निवासियों का वह लंबा इंतजार खत्म होने जा रहा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की संयुक्त घोषणा ने इस पिछड़े क्षेत्र की तकदीर बदलने की नींव रख दी है।
नबन्न में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद इन तीन पिछड़े क्षेत्रों को भारतीय रेल मानचित्र पर शामिल करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। इसे राज्य और जिले के विकास में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।
दूरी के दंश से मिलेगी मुक्ति
वर्तमान में गोपीबल्लभपुर और सुवर्णरेखा नदी के तट पर बसे गांवों के लोगों को ट्रेन पकड़ने के लिए या तो 45 किमी दूर झारग्राम जाना पड़ता है या फिर 65 किमी का लंबा सफर तय कर खड़गपुर पहुंचना पड़ता है। बेहतर इलाज, उच्च शिक्षा या व्यापार के सिलसिले में कोलकाता या भुवनेश्वर जाने वाले लोगों के लिए यह दूरी सबसे बड़ी बाधा थी।
प्रस्तावित योजना के अनुसार, खड़गपुर से संकरैल, बेलियाबेड़ा, गोपीबल्लभपुर और नयाग्राम होते हुए ओडिशा के बारीपदा तक लगभग 99.8 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बिछाई जाएगी। यह रूट न केवल यात्रा का समय बचाएगा, बल्कि दक्षिण भारत और ओडिशा के साथ पश्चिम बंगाल के संपर्क को एक नया आयाम देगा।
जन-आंदोलन की बड़ी जीत
इस रेल मार्ग की मांग को लेकर ‘सुवर्णरैखिक रेलपथ संग्राम समिति’ पिछले चार वर्षों से लगातार संघर्ष कर रही थी। समिति ने रेल अधिकारियों से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक अपनी मांगें पहुँचाई थीं। हाल ही में गोपीबल्लभपुर के विधायक और मंत्री राजेश महतो के साथ हुई बैठक के महज 48 घंटों के भीतर इस परियोजना को हरी झंडी मिलना, क्षेत्र के लोगों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है।
समिति के अध्यक्ष सत्यव्रत राउत ने खुशी जाहिर करते हुए कहा:
“शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार की उन्नति के लिए रेल का कोई विकल्प नहीं है। इस लाइन के आने से गोपीबल्लभपुर के पर्यटन और लघु उद्योगों में उछाल आएगा। सुवर्णरेखा नदी की सुंदरता देखने के लिए अब पर्यटकों का आना-जाना बढ़ेगा।”
लालगढ़: संघर्ष से समृद्धि की ओर
झारग्राम के उत्तरी छोर पर स्थित लालगढ़ के लिए भी यह खबर नई उम्मीदें लेकर आई है। साल 2011-12 में भादुतला से लालगढ़ होते हुए झारग्राम तक रेल रूट की योजना बनी थी, जो फाइलों में ही दबकर रह गई थी। अब नई घोषणा के साथ लालगढ़ के युवाओं के लिए रोजगार और बेहतर भविष्य के द्वार खुलने की संभावना बढ़ गई है।
शिक्षक संदीप पाल के अनुसार, “जंगलमहल के पिछड़े युवाओं के लिए यह परियोजना एक नया क्षितिज खोल देगी। अब इलाज या काम के लिए कोलकाता और भुवनेश्वर पहुंचना बहुत आसान हो जाएगा।”
भूमि अधिग्रहण पर जनता का समर्थन
आमतौर पर रेल परियोजनाओं में जमीन अधिग्रहण एक बड़ी चुनौती होती है, लेकिन जंगलमहल के निवासियों और संग्राम समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि वे विकास के इस कार्य में प्रशासन का पूरा सहयोग करेंगे। ग्रामीणों का मानना है कि यह रेल लाइन उनके जीवन की ‘लाइफलाइन’ है, इसलिए वे भूमि संबंधी किसी भी बाधा को आड़े नहीं आने देंगे।
यह नई रेल परियोजना केवल लोहे की पटरियां नहीं, बल्कि जंगलमहल की आर्थिक समृद्धि, सामाजिक सुधार और प्रगति का एक नया अध्याय है।





