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Fusion of Talent and Waste: कबाड़ से कमाल!!!गुजरात के शख्स ने मात्र ₹30,000 में बना डाली ‘सोलर कार’, बिना पेट्रोल दौड़ेगी 60 KM!!!

Fusion of Talent and Waste:आज के दौर में जहाँ पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ रखी है, वहीं गुजरात के एक साधारण ग्रामीण ने अपनी मेधा और जुगाड़ से पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। गुजरात के साधुलभाई चावडा ने यह साबित कर दिया है कि बड़े आविष्कार केवल बड़ी प्रयोगशालाओं (Labs) के मोहताज नहीं होते। उन्होंने घर के आँगन में बैठकर पुरानी लोहे की कतरनों और बेकार पड़े सामान से एक ऐसी सोर ऊर्जा से चलने वाली कार (Solar Vehicle) तैयार की है, जो अब सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर रही है।

कैसे बनी यह ‘जुगाड़’ वाली शानदार सवारी?

साधुलभाई ने इस गाड़ी को बनाने के लिए किसी शोरूम से नया सामान नहीं खरीदा। उनकी इस सफलता की कहानी ‘वेस्ट से बेस्ट’ का बेहतरीन उदाहरण है:

पुराना लोहा: गाड़ी की पूरी बॉडी बेकार पड़े लोहे के स्क्रैप को वेल्डिंग करके बनाई गई है।

स्कूटर के टायर: सड़क पर मजबूती बनाए रखने के लिए उन्होंने पुराने स्कूटर के टायरों का इस्तेमाल किया है।

ई-बाइक के पार्ट्स: इस कार के मैकेनिकल सिस्टम में पुरानी इलेक्ट्रिक बाइक के कलपुर्जों का उपयोग किया गया है।

चलता-फिरता पावर स्टेशन: धूप से होगी खुद चार्ज

इस गाड़ी की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘सेल्फ-चार्जिंग’ सिस्टम है। साधुलभाई ने गाड़ी की छत पर 100 वॉट के दो सोलर पैनल लगाए हैं।

खास बात: यह गाड़ी चलते समय भी सूर्य की रोशनी से अपनी बैटरी को चार्ज करती रहती है। इसका मतलब है कि आपको चार्जिंग पॉइंट ढूंढने या पेट्रोल पंप की कतार में लगने की कोई जरूरत नहीं है।

शानदार फीचर्स और परफॉरमेंस

भले ही यह गाड़ी कम बजट में बनी हो, लेकिन इसकी खूबियां किसी को भी प्रभावित कर सकती हैं:

फीचर विवरण

माइलेज एक बार फुल चार्ज होने पर 50 से 60 किलोमीटर तक का सफर।

रफ़्तार ग्रामीण रास्तों के हिसाब से 30 से 40 किमी प्रति घंटा की टॉप स्पीड।

क्षमता इस छोटी सी कार में 3 यात्री आराम से बैठ सकते हैं।

सुविधाएं मनोरंजन के लिए म्यूजिक सिस्टम और गर्मी से राहत के लिए छोटा पंखा।

कुल खर्च इस पूरी गाड़ी को तैयार करने में मात्र ₹25,000 से ₹30,000 का खर्च आया है।

मेंटेनेंस का झंझट खत्म

साधुलभाई पिछले चार सालों से इस गाड़ी का इस्तेमाल कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इन चार वर्षों में उन्हें केवल एक बार बैटरी बदलनी पड़ी है, इसके अलावा रखरखाव (Maintenance) का कोई खर्च नहीं हुआ।

यह आविष्कार उन लोगों के लिए एक वरदान साबित हो सकता है जो कम दूरी तय करने के लिए एक सस्ता, टिकाऊ और प्रदूषण मुक्त विकल्प तलाश रहे हैं। साधुलभाई की यह ‘सोलर कार’ न केवल तकनीक का चमत्कार है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की एक सच्ची झलक भी है।

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