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flight of spirits: ट्रक ड्राइवर की बेटी फेरुज फातिमा ने UPSC में लहराया परचम!!!

flight of spirits: ट्रक ड्राइवर की बेटी फेरुज फातिमा ने UPSC में लहराया परचम!!!

नई दिल्ली: कहते हैं कि “मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।” इस कहावत को सच कर दिखाया है उत्तराखंड के हरिद्वार जिले की रहने वाली फेरुज फातिमा ने। साल 2025 की संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में फातिमा ने 708वीं रैंक हासिल कर न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है।

संघर्ष और सफलता की कहानी:

रुड़की के पिरान कलियर की निवासी 27 वर्षीय फातिमा की यह सफलता इसलिए खास है क्योंकि उनका सफर चुनौतियों से भरा रहा। उनके पिता, इकबाल अहमद, एक साधारण ट्रक ड्राइवर हैं और मां एक गृहिणी। आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बावजूद फातिमा ने कभी अपने सपनों से समझौता नहीं किया। यह उनकी 8 साल की लंबी तपस्या और तीसरे प्रयास का परिणाम है कि आज वे देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा का हिस्सा बनने जा रही हैं।

काम के साथ जारी रखी पढ़ाई:

फातिमा की काबिलियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे वर्तमान में दिल्ली में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में डिप्टी मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। नौकरी की जिम्मेदारियों को निभाते हुए यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी करना उनकी अनुशासनप्रियता को दर्शाता है।

रुचियों और व्यक्तित्व का मेल:

पढ़ाई के अलावा फातिमा को रग्बी खेल से बेहद लगाव है। वे न केवल इसे देखना पसंद करती हैं, बल्कि खेल के मैदान की तरह जीवन की चुनौतियों में भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी। फातिमा का मानना है कि परिस्थिति चाहे कैसी भी हो, यदि आप कठिन परिश्रम करने से पीछे नहीं हटते, तो सफलता आपसे कोई नहीं छीन सकता।

उत्तराखंड के अन्य सितारों ने भी चमकाया नाम:

2025 की इस परीक्षा में उत्तराखंड के कई अन्य युवाओं ने भी शानदार प्रदर्शन किया है:

मीनल नेगी (टिहरी): 66वीं रैंक हासिल की। उनके पिता एक स्कूल शिक्षक हैं।

अनुज पंत (चंपावत): 69वीं रैंक प्राप्त कर क्षेत्र का गौरव बढ़ाया।

आदित्य पाठक (पिथौरागढ़): 189वीं रैंक हासिल कर सफलता की सूची में जगह बनाई।

निष्कर्ष: फेरुज फातिमा की यह जीत समाज के उन तमाम युवाओं के लिए एक मिसाल है जो अभावों के कारण अपने सपनों को छोड़ देते हैं। फातिमा ने सिद्ध कर दिया कि प्रतिभा किसी सुख-सुविधा की मोहताज नहीं होती, उसे बस दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत होती है।

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