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INDIA-RUSSIA Friendship: अंतरिक्ष से भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर खास संदेश, अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में फहराया तिरंगा, भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी पर लगी मुहर !!!

अंतरिक्ष से भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर खास संदेश: अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में फहराया तिरंगा, भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी पर लगी मुहर

भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर विश्व ने एक अद्भुत और गौरवशाली दृश्य देखा। पृथ्वी से सैकड़ों किलोमीटर ऊपर कक्षा में चक्कर लगा रहे अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से रूसी कॉस्मोनॉट्स ने भारतवासियों को विशेष बधाई संदेश भेजा। इस दौरान रूसी अंतरिक्ष यात्रियों ने शून्य-गुरुत्वाकर्षण (Zero-Gravity) वातावरण में भारतीय राष्ट्रीय ध्वज ‘तिरंगा’ थामकर दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में दशकों पुरानी और अटूट साझेदारी को रेखांकित किया।

अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से जारी एक विशेष वीडियो संदेश में रूसी कॉस्मोनॉट्स ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम, इसकी विकास यात्रा और विज्ञान के क्षेत्र में हासिल की गई उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि नई दिल्ली और मॉस्को के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में अंतरिक्ष अनुसंधान हमेशा से एक मुख्य स्तंभ रहा है।

अंतरिक्ष से बधाई: कॉस्मोनॉट प्योत्र दुब्रोव का प्रेरणादायी संदेश

वीडियो संदेश की शुरुआत में रूसी कॉस्मोनॉट प्योत्र दुब्रोव (Pyotr Dubrov) ने भारतीय तिरंगे को सम्मानित रूप से हाथ में लेकर भारत के नागरिकों को संबोधित किया:

“प्रिय मित्रों, आज भारत गणराज्य अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। आठ दशक पूर्व भारत ने औपनिवेशिक शासन से मुक्त होकर आत्मनिर्भरता और समृद्धि की एक नई ऐतिहासिक यात्रा शुरू की थी। हम इस अवसर पर भारत के लोगों के लिए शांति, प्रगति और निरंतर समृद्धि की कामना करते हैं।”

प्योत्र दुब्रोव ने जोर देकर कहा कि भारत और रूस का संबंध केवल राजनयिक या व्यापारिक साझेदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साझा वैज्ञानिक वैज्ञानिक जिज्ञासा और तकनीकी सहयोग की एक मजबूत नींव पर टिका हुआ है।

वीडियो में कॉस्मोनॉट्स के साथ भारत-रूस अंतरिक्ष सहयोग के ऐतिहासिक पलों को दर्शाने वाले विशेष पोस्टर और प्रतीक चिह्न भी दिखाई दे रहे थे, जो दोनों देशों के वैज्ञानिक इतिहास की संयुक्त उपलब्धियों को प्रदर्शित करते हैं।

यूरी गागरिन की अंतरिक्ष यात्रा की 65वीं वर्षगांठ और भारत की स्मृतियां

रूसी कॉस्मोनॉट्स ने अपने स्वतंत्रता दिवस संदेश में मानव अंतरिक्ष उड़ानों के इतिहास के एक और महत्वपूर्ण मील के पत्थर को याद किया। वर्ष 2026 रूसी कॉस्मोनॉट यूरी गागरिन की ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा की 65वीं वर्षगांठ का वर्ष भी है। 12 अप्रैल 1961 को अंतरिक्ष में कदम रखने वाले पहले इंसान बनने के बाद, गागरिन ने उसी वर्ष नवंबर में भारत का दौरा किया था।

गागरिन की भारत यात्रा ऐतिहासिक रही थी, जहां तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और भारत की जनता ने उनका अभूतपूर्व स्वागत किया था।

आईएसएस से संदेश देते हुए कॉस्मोनॉट अन्ना किकिना (Anna Kikina) ने यूरी गागरिन के भारत दौरे के उस प्रसिद्ध वाक्य को याद किया:

“ऊपर अंतरिक्ष से भारत बेहद सुंदर दिखाई देता है, लेकिन जब आप जमीन पर उतरते हैं, तो भारत और भी खूबसूरत लगता है क्योंकि यह सच्चे और वफादार दोस्तों का देश है।”

अन्ना किकिना ने कहा कि गागरिन के वे शब्द आज छह दशक बाद भी भारत और रूस के बीच जन-से-जन के संबंधों (people-to-people ties) और वैज्ञानिक विश्वास का मार्गदर्शन करते हैं।

1975 से 1984: भारत-रूस अंतरिक्ष अनुसंधान का स्वर्णिम युग

भारत और रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) के बीच अंतरिक्ष विज्ञान में सहयोग का इतिहास बहुत गहरा है। रूसी कॉस्मोनॉट्स ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उन शुरुआती मिशनों का विशेष उल्लेख किया जिन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की मजबूत नींव रखी।

1. 1975: ‘आर्यभट्ट’ का सफल प्रक्षेपण

जब भारत ने अपने पहले कृत्रिम उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ का निर्माण किया, तब देश के पास इसे कक्षा में स्थापित करने के लिए आवश्यक भारी प्रक्षेपण यान (Launch Vehicle) तकनीक उपलब्ध नहीं थी। सोवियत संघ ने भारत को बिना किसी वित्तीय शर्त के अपना कपुस्टिन यार (Kapustin Yar) कॉस्मोड्रोम और रॉकेट उपलब्ध कराया। 19 अप्रैल 1975 को सोवियत रॉकेट के जरिए आर्यभट्ट का सफल प्रक्षेपण भारतीय अंतरिक्ष यात्रा का पहला मील का पत्थर बना।

2. 1984: राकेश शर्मा की ऐतिहासिक उड़ान

1984 में भारतीय वायु सेना के स्क्वाड्रन लीडर राकेश शर्मा अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बने। उन्होंने सोवियत संघ के सोयुज टी-11 (Soyuz T-11) अंतरिक्ष यान से उड़ान भरी और सोवियत स्पेस स्टेशन सैल्यूट-7 (Salyut 7) पर 7 दिन से अधिक समय बिताया।

अंतरिक्ष से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सवाल पर राकेश शर्मा का उत्तर—“सारे जहां से अच्छा, हिंदुस्तान हमारा”—आज भी हर भारतीय के दिल में रचा-बसा है। इस मिशन में उनके साथ सोवियत कॉस्मोनॉट यूरी मालिशेव और गेनाडी स्ट्रेकालोव शामिल थे।

‘गगनयान’ मिशन और भविष्य की नई उड़ान

संदेश में कॉस्मोनॉट्स ने भारत के पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम ‘गगनयान’ (Gaganyaan) का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत और रूस का वैज्ञानिक सहयोग अतीत की उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य के अत्याधुनिक मिशनों की ओर मजबूती से बढ़ रहा है।

‘गगनयान’ मिशन के तहत चुने गए भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों (गगनयात्रियों) ने रूस के स्टार सिटी स्थित ऐतिहासिक ‘यूरी गागरिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर’ (GCTC) में अपना गहन और कठोर प्रशिक्षण पूरा किया है।

रूसी विशेषज्ञों और कॉस्मोनॉट्स ने भारतीय दल को निम्नलिखित मुख्य क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया:

  • शून्य-गुरुत्वाकर्षण (Microgravity) अनुकूलन: अंतरिक्षीय वातावरण में शरीर को संतुलित रखने की कला।

  • आपातकालीन स्थिति प्रबंधन (Emergency Survival): विभिन्न प्रकार के इलाकों (पानी, बर्फ, जंगल) में लैंडिंग के समय बचाव तकनीक।

  • सोयुज और स्पेससूट सिस्टम: रूसी स्पेससूट और जीवन रक्षक प्रणालियों (Life Support Systems) का संचालन।

कॉस्मोनॉट आंद्रे फेद्यायेव (Andrey Fedyaev) ने कहा:

“हम भारतीय गगनयात्रियों के साथ काम करके बेहद सम्मानित महसूस कर रहे हैं। उनका समर्पण और पेशेवर दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करता है कि भारत का गगनयान मिशन एक ऐतिहासिक सफलता होगा।”

इसरो और रोसकॉसम्स की संयुक्त पहल: नई पीढ़ी का जुड़ाव

इस ऐतिहासिक अवसर पर रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोसकॉसम्स (Roscosmos) और इस्रो (ISRO) ने दोनों देशों के युवाओं और स्कूली छात्रों के लिए विशेष प्रतियोगिताओं का आयोजन किया।

प्रतियोगिता का विषय था: “भारत-रूस अंतरिक्ष सहयोग और भविष्य का अंतरिक्ष अन्वेषण”

दोनों देशों के बच्चों द्वारा बनाई गई सर्वश्रेष्ठ कलाकृतियों और पोस्टरों को डिजिटल रूप में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन भेजा गया, जिन्हें कॉस्मोनॉट्स ने अपने वीडियो संदेश के दौरान पृष्ठभूमि में प्रदर्शित किया। यह पहल दोनों देशों की युवा पीढ़ी के बीच वैज्ञानिक दृष्टिकोण और रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देने का एक अनूठा प्रयास है।

“भारत-रूस मैत्री अमर रहे”: तिरंगे के साथ विदाई संदेश

वीडियो संदेश के अंतिम चरण में तीनों रूसी कॉस्मोनॉट्स ने एक साथ आकर भारतीय तिरंगे को फहराया और भारत के नागरिकों को 80वें स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं।

कॉस्मोनॉट प्योत्र दुब्रोव ने हिंदी में शुभकामनाएं देते हुए कहा:

“80वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं! भारत और रूस की दोस्ती अमर रहे!”

वैश्विक कूटनीति और अंतरिक्ष अन्वेषण में इस संदेश का महत्व

अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से प्राप्त यह बधाई संदेश केवल एक औपचारिक शुभकामना नहीं है, बल्कि इसके रणनीतिक और कूटनीतिक मायने भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:

  1. अटूट रणनीतिक भरोसा: वैश्विक भू-राजनीतिक परिवर्तनों के बावजूद, भारत और रूस के तकनीकी और वैज्ञानिक संबंध पूरी तरह से मजबूत और स्थिर हैं।

  2. तकनीकी आदान-प्रदान: गगनयान मिशन में रूसी अनुभव और जीवन रक्षक प्रणालियों के ज्ञान का उपयोग भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम को मजबूती प्रदान कर रहा है।

  3. भविष्य के स्टेशन और चंद्रमा मिशन: भारत द्वारा 2035 तक ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (BAS) की स्थापना और 2040 तक चंद्रमा पर मानव भेजने के लक्ष्यों में रूस की तकनीकी साझेदारी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और वैज्ञानिक समुदाय ने रूसी कॉस्मोनॉट्स के इस विशेष संदेश और सम्मान के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है। अंतरिक्ष से आया यह संदेश दर्शाता है कि जब पृथ्वी की सीमाओं से परे जाकर विज्ञान और खोज की बात आती है, तो भारत और रूस की साझेदारी वैश्विक प्रगति के लिए एक मिसाल पेश करती है।

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Ek Dunya: दुर्गापुर के सृजनी प्रेक्षागृह में आयोजन, तकनीक, मानवीय संवेदना और सामाजिक विकास का नया अध्याय!!!

दुर्गापुर के सृजनी प्रेक्षागृह में ‘एक दुनिया’ का ऐतिहासिक आयोजन: तकनीक, मानवीय संवेदना और सामाजिक विकास का नया अध्याय

 औद्योगिक एवं सांस्कृतिक नगरी दुर्गापुर के प्रसिद्ध सृजनी प्रेक्षागृह में ‘एक दुनिया’ संस्था के तत्त्वावधान में एक भव्य एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम ‘बंधुर बंधन’ का सफलतापूर्वक आयोजन संपन्न हुआ। इस विशेष आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में आपसी मानवीय संबंधों को और अधिक सुदृढ़, आत्मीय एवं प्रगाढ़ बनाना था। इसके साथ ही, तेजी से बदलती आधुनिक दुनिया में प्रौद्योगिकी (तकनीक) को केवल एक यांत्रिक साधन न मानकर उसे जन-कल्याण, सामाजिक उत्थान और सर्वांगीण विकास का सशक्त हथियार बनाने का एक स्पष्ट और युगपरिवर्तकारी संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का मुख्य ध्येय वाक्य था— ‘एक बंधन • एक स्वप्न • एक भविष्य’। इस विचार को केंद्र में रखकर आयोजित इस संगोष्ठी और सांस्कृतिक समागम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए बुद्धिजीवियों, समाजशास्त्रियों, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों और आम नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि आधुनिक दौर में प्रौद्योगिकी और मानवीय संवेदनाओं का संतुलन ही एक न्यायसंगत और समृद्ध समाज की नींव रख सकता है।

तकनीक की सार्थकता: अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे विकास की रोशनी

आज का युग डिजिटल क्रांति का युग है। तकनीक ने मानव जीवन की गति को अभूतपूर्व रूप से तीव्र, सहज, सुविधाजनक और आधुनिक बना दिया है। परंतु, ‘बंधुर बंधन’ कार्यक्रम में वक्ताओं ने अत्यंत गंभीरता से इस पहलू को रेखांकित किया कि प्रौद्योगिकी का वास्तविक मूल्य और उसकी वास्तविक सार्थकता केवल बड़े शहरों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों या संपन्न वर्गों तक सीमित रहने में नहीं है। डिजिटल प्रगति की सच्ची सफलता तभी सिद्ध होती है जब इसका प्रत्यक्ष लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति, दूरदराज के ग्रामीण इलाकों और वंचित वर्गों तक पूरी पारदर्शिता एवं सहजता के साथ पहुंचे।
इसी दूरदर्शी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए ‘एक दुनिया’ पहल की नींव रखी गई है। संस्था ने घोषणा की कि वह स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) और डिजिटल पर्यटन जैसे अति-महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तकनीक-आधारित समावेशी अवसर उत्पन्न करने के संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है।

‘एक दुनिया’ के प्रमुख पांच कार्यक्षेत्र: एक विस्तृत दृष्टिकोण

कार्यक्रम के दौरान ‘एक दुनिया’ के प्रतिनिधियों ने उन प्राथमिक क्षेत्रों पर प्रकाश डाला, जिनमें तकनीकी हस्तक्षेप के माध्यम से क्रांतिकारी और दीर्घकालिक परिवर्तन लाए जा रहे हैं:

1. डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं: आपकी चौखट पर बेहतर इलाज

ग्रामीण और सुदूरवर्ती क्षेत्रों में आज भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। ‘एक दुनिया’ डिजिटल तकनीक और टेलीमेडिसिन के माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाओं को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाने की दिशा में कार्यरत है। डिजिटल हेल्थ कंसल्टेशन, प्राथमिक जांच किट्स और त्वरित आपातकालीन सूचना प्रणाली के जरिए अब सुदूर क्षेत्रों के निवासियों को भी वही परामर्श और देखभाल मिल सकेगी जो बड़े शहरों के अस्पतालों में उपलब्ध होती है।

2. शिक्षा का सर्वसुलभ विस्तार: ज्ञान की नई डिजिटल किरण

शिक्षा ही वह माध्यम है जो पीढ़ियों का भाग्य बदल सकती है। दूरदराज के क्षेत्रों में अवसंरचनात्मक कमियों को दूर करने के लिए संस्था डिजिटल कक्षाओं, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म्स और इंटरैक्टिव स्टडी मैटेरियल का सहारा ले रही है। इससे उन बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और वैश्विक ज्ञान भंडार तक पहुंच प्राप्त होगी, जो अब तक संसाधनों के अभाव में मुख्यधारा से कटे हुए थे।

3. नए रोजगार और आजीविका के रास्ते

परंपरागत रोजगार के अवसर सीमित हो रहे हैं, जबकि डिजिटल अर्थव्यवस्था में अवसरों की कोई कमी नहीं है। ‘एक दुनिया’ ग्रामीण युवाओं और स्थानीय कारीगरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से जोड़कर उन्हें सीधे बाजारों तक पहुंच प्रदान कर रही है। चाहे वह ई-कॉमर्स हो, डिजिटल फ्रीलांसिंग हो या स्थानीय सेवाओं का डिजिटलीकरण—युवाओं के लिए आजीविका के नए और टिकाऊ मार्ग खोले जा रहे हैं।

4. डिजिटल पर्यटन: सांस्कृतिक विविधता को वैश्विक पहचान

भारत का प्रत्येक अंचल अपनी सांस्कृतिक और प्राकृतिक विविधता के लिए जाना जाता है। ‘डिजिटल टूरिज्म’ के माध्यम से स्थानीय पर्यटन स्थलों, लोक कलाओं, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक धरोहरों को वैश्विक पटल पर प्रस्तुत किया जा रहा है। इससे न केवल देश और दुनिया के लोग अनछुए पर्यटन स्थलों से परिचित होंगे, बल्कि स्थानीय निवासियों के लिए आय और स्वरोजगार के बेहतरीन साधन भी विकसित होंगे।

5. कौशल विकास एवं डिजिटल सशक्तिकरण: आत्मनिर्भरता की ओर कदम

केवल उपकरण देना काफी नहीं है, बल्कि लोगों को उन उपकरणों का सही उपयोग सिखाना असली सशक्तिकरण है। ‘एक दुनिया’ स्थानीय स्तर पर डिजिटल साक्षरता और कौशल विकास कार्यशालाओं का आयोजन कर रही है। आम नागरिकों, महिलाओं और युवाओं को डिजिटल उपकरणों और ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग करने में दक्ष बनाया जा रहा है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और आत्मविश्वास के साथ आधुनिक समाज में अपनी भूमिका निभा सकें।

विकास की नई परिभाषा: कोई पीछे न छूटे

सृजनी प्रेक्षागृह के मंच से ‘एक दुनिया’ की ओर से एक अत्यंत संवेदनशील संदेश दिया गया: “विकास तभी अपनी पूर्णता को प्राप्त करता है, जब उस विकास के फल समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक समान रूप से पहुंचे।”
यदि प्रगति की दौड़ में समाज का कोई एक वर्ग भी पीछे छूट जाता है, तो उस प्रगति को समावेशी नहीं कहा जा सकता। ‘बंधुर बंधन’ का मूल दर्शन इसी विचार पर आधारित है।
मुख्य स्तंभ विवरण एवं उद्देश्य
आस्था (Faith) एक-दूसरे के प्रति और सामूहिक प्रगति के प्रति अटूट विश्वास जगाना।
सहयोग (Cooperation) समाज, सरकार और तकनीक का हाथ मिलाकर साझा लक्ष्य के लिए कार्य करना।
सहमर्माता (Empathy) दूसरों की समस्याओं को समझना और मानवीय दृष्टिकोण से समाधान खोजना।
एकसाथ आगे बढ़ना (Collective Growth) किसी भी वर्ग को पीछे छोड़े बिना विकास की राह पर साथ चलना।

औद्योगिक माटी से सामाजिक परिवर्तन की ललकार

दुर्गापुर केवल लोहे और इस्पात का शहर नहीं है, यह बौद्धिक और सांस्कृतिक चेतना का भी एक प्रमुख केंद्र रहा है। दुर्गापुर की इस ऐतिहासिक माटी से ‘एक दुनिया’ ने पूरे देश को एक नया दिशा-निर्देश दिया है। यहाँ से यह आह्वान किया गया कि तकनीक की शक्ति का उपयोग शहरी सीमाओं के भीतर समेटकर न रखा जाए।
डिजिटल प्रगति का मुख्य केंद्र ग्राम, कस्बों और सामान्य जनजीवन की वास्तविक समस्याओं के समाधान में होना चाहिए। जब तकनीक ग्रामीण जीवन शैली में सकारात्मक और रचनात्मक बदलाव लाएगी, तभी देश का वास्तविक और सतत विकास संभव हो सकेगा।

एक नया संकल्प, एक उज्ज्वल कल

कार्यक्रम का समापन एक सामूहिक संकल्प और आशावादी संदेश के साथ हुआ। ‘एक दुनिया’ की इस दूरगामी पहल का एकमात्र और अंतिम लक्ष्य यही है कि—
  • प्रौद्योगिकी होगी इंसानों के लिए,
  • विकास होगा सभी के लिए, और
  • इस प्रगति यात्रा में कोई भी पीछे नहीं छूटेगा।
यह आयोजन केवल एक एक-दिवसीय समारोह नहीं था, बल्कि यह मानवीय रिश्तों को मजबूत करने और आधुनिक तकनीक को समाज कल्याण में नियोजित करने के एक महा-अभियान का शंखनाद था।

समारोह का सार-सूत्र

एक दुनिया — एक बंधन : : एक स्वप्न — एक साथ आगे बढ़ना : : एक भविष्य — सबके लिए विकास

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मानसून में बच्चों की सेहत की सुरक्षा: बीमारियों से बचाव के लिए माता-पिता के लिए गाइड

बारिश का मौसम जहाँ चिलचिलाती धूप और गर्मी से राहत देता है, वहीं बच्चों के स्वास्थ्य के लिए कई तरह की चुनौतियाँ भी साथ लाता है। मानसून में हवा में नमी (ह्यूमिडिटी), जलभराव और फफूंद (मोल्ड) के कारण वायरस, बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपते हैं। वयस्क व्यक्तियों की तुलना में बच्चों का इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) कम विकसित होता है, जिससे वे डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, डायरिया, फ्लू और त्वचा के संक्रमण की चपेट में आसानी से आ जाते हैं।
बारिश के दिनों में बच्चों को बीमारियों से बचाने और उनके बचपन को आनंदमय बनाए रखने के लिए स्वच्छता, सही खानपान और दिनचर्या से जुड़े नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। बाल रोग विशेषज्ञों और स्वास्थ्य रिपोर्टों के आधार पर मानसून में बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रमुख सावधानियाँ नीचे दी गई हैं।

1. मानसून में बच्चों में बढ़ने वाले प्रमुख स्वास्थ्य जोखिम

बरसात के मौसम में तापमान में उतार-चढ़ाव और वातावरण में नमी के कारण निम्नलिखित बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा रहता है:
  1. मच्छर जनित रोग (डेंगू, मलेरिया, चिकुनगुनिया): बारिश के बाद खाली पड़े बर्तनों, गमलों या नालियों में पानी जमा होने से मच्छर तेजी से अंडे देते हैं।
  2. जल जनित रोग (टाइफाइड, डायरिया, पीलिया): दूषित पानी या सड़क किनारे खुले में बिकने वाले भोजन के सेवन से पेट के गंभीर संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
  3. श्वसन तंत्र से जुड़े संक्रमण (सर्दी-खांसी, फ्लू, निमोनिया): बारिश में भीगने या अचानक तापमान बदलने से वायरल इन्फेक्शन तेजी से फैलता है।
  4. त्वचा और फंगल इंफेक्शन: कपड़ों में नमी रहने या पसीने के कारण बच्चों की नाजुक त्वचा पर रैशेज, खुजली और फंगल इंफेक्शन हो जाता है।

2. स्वच्छ पेयजल और पौष्टिक खानपान

मानसून के दौरान बच्चों को अंदर से मजबूत बनाने के लिए सुरक्षित पेयजल और संतुलित आहार देना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
  • उबला या फिल्टर किया पानी: बारिश के मौसम में नल का पानी दूषित होने की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए पानी को कम से कम 10 से 15 मिनट तक उबालकर और ठंडा करके ही बच्चों को पीने के लिए दें।
  • ताजा और गर्म भोजन: बच्चों को हमेशा घर पर बना गर्म और ताजा खाना दें। लंबे समय तक बाहर रखा या बासी भोजन बैक्टीरिया का केंद्र बन सकता है।
  • इम्युनिटी बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ: बच्चों की डाइट में विटामिन C समृद्ध फल (जैसे संतरा, अमरूद, नीबू), हरी सब्जियाँ, ड्राई फ्रूट्स और डेयरी प्रोडक्ट्स शामिल करें।
  • स्ट्रीट फूड और खुले खाने से परहेज: सड़क किनारे मिलने वाले गोलगप्पे, चाट, कटी हुई सब्जियों या बर्फ वाली चीजों का सेवन बच्चों को न करने दें।

3. व्यक्तिगत स्वच्छता और कपड़ों की देखभाल

बच्चों में स्वच्छता की आदतें विकसित करके कई तरह के बैक्टीरिया और वायरस के फैलाव को रोका जा सकता है।
  • हाथ धोने की आदत: खाना खाने से पहले, बाहर से खेल कर आने पर और शौचालय का उपयोग करने के बाद बच्चों को 20 सेकंड तक साबुन और पानी से हाथ धोने के लिए प्रेरित करें।
  • नाखूनों की सफाई: बच्चों के नाखूनों को नियमित रूप से काटें, क्योंकि नाखूनों में जमा गंदगी खाने के साथ पेट में जाकर डायरिया या कीड़ों (वर्म्स) का कारण बनती है।
  • सूखे और सूती कपड़े: मानसून में बच्चों को 100% सूती, ढीले और पूरी बाजू के कपड़े पहनाएं। कपड़े धोने के बाद अगर धूप न निकले तो उन्हें अच्छी तरह सुखाकर इस्त्री (Iron) करके पहनाएं, जिससे कपड़ों की नमी और कीटाणु खत्म हो जाएं।
  • डायपर की देखभाल: छोटे शिशुओं के डायपर को नियमित रूप से चेक करते रहें। लंबे समय तक गीला डायपर पहनने से त्वचा पर रैशेज और इंफेक्शन हो सकता है।

4. मच्छरों से बचाव और घर की सफाई

मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों से बच्चों को सुरक्षित रखना अभिभावकों के लिए बेहद जरूरी है।
  • मच्छरदानी का इस्तेमाल: बच्चे के सोने के समय (चाहे दिन हो या रात) मच्छरदानी का प्रयोग करें।
  • सुरक्षित मॉस्किटो रिपेलेंट: घर से बाहर खेलते समय बच्चों के खुले अंगों पर बाल-सुरक्षित (Child-safe) मॉस्किटो क्रीम या पैच लगाएं।
  • जमा पानी का निपटारा: घर के आसपास या बालकनी में गमलों, कूलरों और खाली बर्तनों में पानी जमा न होने दें।
  • फर्श की सफाई: घर के फर्श की सफाई करते समय पानी में एंटीसेप्टिक लिक्विड मिलाएं ताकि कीटाणु नष्ट हो सकें।

5. बारिश में भीगने के बाद की देखभाल

यदि बच्चा बारिश में भीग जाता है, तो तुरंत कुछ आसान कदम उठाकर उसे बीमार होने से बचाया जा सकता है:
  1. बच्चे के घर पहुंचते ही उसके गीले कपड़े बदलकर उसे साफ और सूखे कपड़े पहनाएं।
  2. बच्चे को हल्के गुनगुने पानी से नहलाएं और उसके सिर व शरीर को तौलिया से अच्छी तरह सुखाएं।
  3. शरीर को अंदर से गर्माहट देने के लिए बच्चे को गुनगुना दूध, सूप या हल्का काढ़ा पीने को दें।
  4. जमा हुए नोकरे या गंदे पानी में बच्चों को न खेलने दें, क्योंकि इससे लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा रहता है।

संक्षेप में: मानसून चाइल्ड केयर गाइड

क्षेत्र क्या करें क्या न करें
पेयजल उबला या RO फिल्टर का पानी दें सड़क किनारे का खुला पानी या बर्फ एविड करें
आहार ताजा, गर्म और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन कटे हुए फल, बासी खाना और स्ट्रीट फूड
कपड़े सूखे, सूती और पूरी बाजू के कपड़े सीलन भरे, गीले या टाइट कपड़े
सुरक्षा मच्छरदानी और रिपेलेंट का इस्तेमाल करें घर के आसपास गंदा पानी जमा होने दें
मानसून का मौसम बच्चों के लिए मस्ती और मनोरंजन से भरपूर होता है। यदि माता-पिता खानपान, स्वच्छता और घर के वातावरण को लेकर थोड़ी सावधानी बरतें, तो बच्चे बिना बीमार पड़े इस मौसम का पूरा आनंद ले सकते हैं। बच्चे में तेज बुखार, लगातार उल्टी, दस्त या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखने पर बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

Monsoon: मानसून में बुजुर्गों की देखभाल, स्वस्थ और सुरक्षित रहने के लिए संपूर्ण स्वास्थ्य गाइड!!! 

मानसून में बुजुर्गों की देखभाल: स्वस्थ और सुरक्षित रहने के लिए संपूर्ण स्वास्थ्य गाइड 

मानसून की फुहारें जहां प्रकृति को नया जीवन देती हैं और भीषण गर्मी से राहत दिलाती हैं, वहीं यह मौसम वरिष्ठ नागरिकों (बुजुर्गों) के स्वास्थ्य के लिए कई प्रकार की चुनौतियां लेकर आता है। बढ़ती उम्र के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) स्वाभाविक रूप से कम होने लगती है। इसके साथ ही, यदि वे पहले से ही मधुमेह (Diabetes), उच्च रक्तचाप (Hypertension), गठिया (Arthritis) या श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं, तो बरसात का यह मौसम उनके लिए विशेष सावधानी बरतने का समय बन जाता है।

हवा में अत्यधिक नमी (Humidity), दूषित जल और मच्छरों का प्रकोप इस मौसम में संक्रमणों के खतरे को बढ़ा देता है। इस विशेष समाचार रिपोर्ट में, हम मानसून के दौरान बुजुर्गों को होने वाली संभावित स्वास्थ्य समस्याओं और उनसे बचाव के लिए आवश्यक संपूर्ण स्वास्थ्य नियमों (Health Rules) पर विस्तार से चर्चा कर रहे हैं।

१. मानसून में बुजुर्गों के सामने मुख्य स्वास्थ्य जोखिम

बरसात के मौसम में तापमान में उतार-चढ़ाव और वातावरण में नमी के कारण हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस और फंगस तेजी से पनपते हैं। वरिष्ठ नागरिकों में निम्नलिखित स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम सबसे अधिक देखा जाता है:

मच्छर जनित बीमारियां (Vector-Borne Diseases)

रुके हुए पानी में मच्छरों के पनपने से डेंगू, मलेरिया और चिकुनगुनिया का प्रकोप बढ़ जाता है। बुजुर्गों में प्लेटलेट्स घटने या निर्जलीकरण (Dehydration) का खतरा वयस्कों की तुलना में अधिक गंभीर हो सकता है।

जल जनित एवं पाचन संबंधी संक्रमण (Water-Borne & Gastrointestinal Infections)

बरसात में पेयजल स्रोतों के दूषित होने की संभावना अधिक होती है। इससे हैजा (Cholera), टाइफाइड, पीलिया (Jaundice) और फूड पॉइज़निंग जैसी पेट की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।

श्वसन संबंधी समस्याएं (Respiratory Infections)

घर के भीतर नमी और फफूंदी (Mould/Fungus) की वजह से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, निमोनिया और मौसमी फ्लू का खतरा बढ़ जाता है।

जोड़ों का दर्द और गठिया की तीव्रता (Arthritis & Joint Pains)

वायुमंडलीय दबाव (Barometric Pressure) में कमी और ठंडी-नम हवाओं के कारण बुजुर्गों में जोड़ों के दर्द और अकड़न की समस्या बढ़ जाती है।

फिसलकर गिरने का जोखिम (Slipping & Fall Hazards)

बरसात में फर्श, सीढ़ियां और बाथरुम नम या फिसलन भरे हो जाते हैं। कमजोर दृष्टि और संतुलन की कमी के कारण बुजुर्गों के गिरने और हड्डी टूटने (विशेषकर हिप फ्रैक्चर) का खतरा रहता है।

२. खान-पान और पेय पदार्थों की सुरक्षा

मानसून के दौरान पाचन तंत्र थोड़ा सुस्त हो जाता है, इसलिए हल्का, सुपाच्य और ताजा भोजन ही लेना चाहिए।

पानी की शुद्धता और हाइड्रेशन

  • उबला हुआ पानी: पीने के पानी को कम से कम १० से १५ मिनट अच्छी तरह उबालकर ही ठंडा करके पिएं। आरओ या फिल्टर के पानी को भी उबालना अतिरिक्त सुरक्षा देता है।

  • पर्याप्त जल सेवन: बरसात में प्यास कम लगती है, फिर भी शरीर में पानी की कमी (Dehydration) न होने दें। दिन में ७-८ गिलास गुनगुना पानी पिएं।

आहार में क्या शामिल करें और किससे बचें

खाद्य श्रेणी क्या खाएं (अनुशंसित) क्या न खाएं (वर्जित)
सब्जियां लौकी, तोरई, कद्दू, गाजर, उबली हुई सब्जियां कच्ची पत्तेदार सब्जियां, बिना धुली सलाद, मशरूम
प्रोटीन मूंग दाल, हल्का पका हुआ सूप, उबला अंडा अत्यधिक मसालेदार या भारी नॉन-वेज, डीप फ्राई स्नैक्स
इम्यूनिटी बूस्टर अदरक-तुलसी की चाय, हल्दी वाला दूध, काढ़ा स्ट्रीट फूड, पैकेज्ड कटी हुई फ्रूट चाट, बर्फ वाले पेय
पाचन सहायक ताजा ताज़ा जमा दही या छाछ (सीमित मात्रा में) अत्यधिक ठंडा, बासी या रेफ्रिजरेटेड खाना

३. व्यक्तिगत स्वच्छता और त्वचा की देखभाल

  • गुनगुने पानी से स्नान: ठंडे पानी के बजाय हल्के गुनगुने पानी से स्नान करें। इससे रक्तसंचार बेहतर रहता है और मांसपेशियों का खिंचाव कम होता है।

  • त्वचा को सूखा रखें: शरीर की सिलवटों (जैसे कांख, पैर की उंगलियों के बीच) में नमी जमा न होने दें। स्नान के बाद एंटी-फंगल पाउडर का इस्तेमाल करें।

  • पैरों की विशेष देखभाल: मधुमेह (Diabetes) से पीड़ित बुजुर्गों को बरसात के पानी और कीचड़ से अपने पैरों को बचाना चाहिए। हमेशा सूखे जूते या नॉन-स्लिप सैंडल पहनें।

४. घर के भीतर की सुरक्षा और गिरने से बचाव

बरसात के दिनों में अधिकांश समय घर के अंदर बीतता है, इसलिए घरेलू वातावरण को सुरक्षित बनाना बेहद जरूरी है।

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Women Digital Service & Marketing Center:डिजिटल क्रांति से महिला सशक्तिकरण!!! दुर्गापुर में खुलेगा ‘विमेन डिजिटल सर्विस एंड मार्केटिंग सेंटर’!!!

Women Digital Service & Marketing Center:वर्तमान डिजिटल युग में महिलाओं का सशक्तिकरण अब सिर्फ एक विचार या सपना नहीं रह गया है, बल्कि यह किसी भी राष्ट्र और समाज के समग्र विकास का मजबूत आधार बन चुका है। इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए Ekdunia.com की पहल पर 8 अगस्त 2026 को दोपहर 12:00 बजे दुर्गापुर के ‘सृजनी प्रेक्षागृह’ (Srijani Auditorium) में ‘Women Digital Service & Marketing Center’ का भव्य शुभारंभ होने जा रहा है।

आत्मनिर्भरता और डिजिटल तकनीक का संगम

इस डिजिटल केंद्र का प्राथमिक उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। यह केंद्र उन महिला उद्यमियों के लिए एक मजबूत मंच साबित होगा जो हस्तशिल्प, घरेलू खाद्य उत्पाद, परिधान या अन्य हस्तनिर्मित सामग्री तैयार करती हैं।

इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से महिलाओं को निम्नलिखित सुविधाएं दी जाएंगी:

विपणन एवं बिक्री में सहयोग: उत्पादों के क्रय-विक्रय और विपणन के लिए एकीकृत मंच।

डिजिटल मार्केटिंग: सोशल मीडिया व ऑनलाइन माध्यमों से उत्पादों का प्रचार-प्रसार।

ऑर्डर प्रबंधन: ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह के ऑर्डर को व्यवस्थित करने में पूर्ण तकनीकी सहायता।

AI माँ’ पहल से घर-घर पहुंचेंगी डिजिटल सेवाएं

इस केंद्र के साथ-साथ ‘AI Maa’ पहल की भी शुरुआत की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य आधुनिक डिजिटल सेवाओं को आम जनता के दरवाजे तक पहुंचाना है। महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और डिजिटल साक्षरता प्रदान कर रोजगार के नए अवसर पैदा करना इस योजना का मुख्य लक्ष्य है।

दक्षिण बंगाल के 4 जिलों को मिलेगा सीधा फायदा

दुर्गापुर स्थित यह केंद्र एक मुख्य समन्वयक (Hub) के रूप में कार्य करेगा, जिससे मुख्य रूप से चार बड़े जिले लाभान्वित होंगे:

पश्चिम बर्धमान

पूर्व बर्धमान

बांकुरा

पुरुलिया

इस पहल से इस पूरे क्षेत्र की महिला उद्यमियों को न केवल स्थानीय स्तर पर मदद मिलेगी, बल्कि उनके स्थानीय उत्पादों को देश के बड़े और नए बाजारों तक पहुंचाने का एक नया रास्ता भी खुलेगा।

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मानसून में बुखार होने पर क्या करें? सही देखभाल और समय पर उपचार से बच सकती हैं गंभीर परेशानियाँ

मानसून का मौसम अपने साथ हरियाली, ठंडी हवाएँ और बारिश की सौगात लेकर आता है, लेकिन इसी मौसम में कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी तेजी से बढ़ जाता है। बारिश के कारण वातावरण में नमी बढ़ने, जगह-जगह जलभराव होने और मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनने से वायरल संक्रमण, डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, टाइफाइड और अन्य संक्रमणों के मामले बढ़ जाते हैं। इन सभी बीमारियों का सबसे सामान्य लक्षण बुखार है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान होने वाले हर बुखार को सामान्य वायरल बुखार मानकर अनदेखा करना खतरनाक हो सकता है। कई बार हल्का दिखने वाला बुखार भी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। इसलिए बुखार होने पर घबराने के बजाय सही जानकारी, उचित देखभाल और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना सबसे महत्वपूर्ण है।

मानसून में बुखार क्यों बढ़ जाता है?

बारिश के मौसम में वातावरण में नमी अधिक रहती है, जिससे वायरस और बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं। कई स्थानों पर पानी जमा होने के कारण मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है, जो डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियाँ फैलाते हैं।

इसके अलावा इस मौसम में दूषित भोजन, अस्वच्छ पेयजल और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण भी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। तापमान में अचानक बदलाव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करता है, जिससे संक्रमण आसानी से हो सकता है।

बुखार होने पर सबसे पहले क्या करें?

यदि शरीर गर्म महसूस हो तो सबसे पहले थर्मामीटर से तापमान मापें। केवल अनुमान के आधार पर दवा लेना उचित नहीं है।

यदि तापमान सामान्य से अधिक है लेकिन रोगी की स्थिति स्थिर है, तो सबसे पहले आराम करें और शरीर की स्थिति पर ध्यान दें। यदि तेज बुखार, कमजोरी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।

पर्याप्त आराम बेहद जरूरी

बुखार के दौरान शरीर संक्रमण से लड़ने में अपनी ऊर्जा खर्च करता है। इसलिए पर्याप्त आराम करना आवश्यक है।

बहुत अधिक शारीरिक श्रम, देर रात तक जागना या लगातार काम करना शरीर की रिकवरी को धीमा कर सकता है। अच्छी नींद रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

शरीर में पानी की कमी न होने दें

बुखार के दौरान पसीना अधिक आता है, जिससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है। इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बहुत जरूरी है।

इसके साथ ही निम्नलिखित तरल पदार्थ भी लिए जा सकते हैं—

  • ओआरएस घोल
  • नारियल पानी
  • नींबू पानी
  • ताजा फलों का रस
  • सूप
  • छाछ (यदि चिकित्सक मना न करें)

पर्याप्त तरल पदार्थ शरीर को हाइड्रेट रखते हैं और कमजोरी कम करने में मदद करते हैं।

हल्का और पौष्टिक भोजन करें

बुखार के समय कई लोगों की भूख कम हो जाती है, लेकिन भोजन पूरी तरह छोड़ना सही नहीं है।

आहार में शामिल करें—

  • खिचड़ी
  • दलिया
  • दाल
  • उबली हुई सब्जियाँ
  • अंडा
  • मछली या चिकन (यदि उपयुक्त हो)
  • दही (चिकित्सकीय सलाह के अनुसार)
  • मौसमी फल

अत्यधिक तला-भुना, मसालेदार और बासी भोजन से बचना चाहिए।

बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक न लें

हर बुखार बैक्टीरिया के कारण नहीं होता। वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक दवाएँ प्रभावी नहीं होतीं।

बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक लेने से दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सकती है, जिससे भविष्य में उपचार कठिन हो सकता है।

बुखार कम करने के लिए क्या करें?

यदि बुखार अधिक हो तो—

  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लें।
  • गुनगुने पानी की पट्टी कर सकते हैं।
  • हल्के और आरामदायक कपड़े पहनें।
  • कमरे में पर्याप्त हवा का प्रवाह बनाए रखें।

बहुत ठंडे पानी या बर्फ का उपयोग करने से बचें।

कब तुरंत डॉक्टर के पास जाएँ?

यदि निम्नलिखित में से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो तुरंत अस्पताल जाएँ—

  • 103°F या उससे अधिक बुखार
  • तीन दिन से अधिक लगातार बुखार
  • साँस लेने में तकलीफ
  • लगातार उल्टी
  • बेहोशी
  • दौरे पड़ना
  • शरीर पर लाल चकत्ते
  • नाक या मसूड़ों से रक्तस्राव
  • अत्यधिक कमजोरी
  • पेशाब कम होना

डेंगू के लक्षणों को पहचानें

मानसून में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ते हैं।

मुख्य लक्षण—

  • अचानक तेज बुखार
  • सिरदर्द
  • आँखों के पीछे दर्द
  • मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द
  • त्वचा पर लाल चकत्ते
  • मतली और उल्टी
  • अत्यधिक थकान

ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत रक्त जांच और चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक है।

बच्चों के लिए विशेष सावधानी

बच्चों में संक्रमण तेजी से बढ़ सकता है।

यदि बच्चा—

  • बार-बार रो रहा हो,
  • कुछ भी खाने से मना कर रहा हो,
  • लगातार सो रहा हो,
  • दौरे पड़ रहे हों,
  • साँस लेने में कठिनाई हो,

तो तुरंत अस्पताल ले जाएँ।

बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को अधिक सतर्क रहने की जरूरत

बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएँ और मधुमेह, हृदय रोग, किडनी या फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों में बुखार गंभीर रूप ले सकता है।

ऐसे व्यक्तियों को शुरुआती लक्षणों में ही चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

मानसून में बुखार से कैसे बचें?

कुछ सरल सावधानियाँ अपनाकर संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है—

  • घर के आसपास पानी जमा न होने दें।
  • मच्छरदानी का प्रयोग करें।
  • पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें।
  • साफ और सुरक्षित पेयजल का उपयोग करें।
  • भोजन को ढककर रखें।
  • बाहर से आने के बाद साबुन से हाथ धोएँ।
  • ताजा और स्वच्छ भोजन करें।
  • नियमित व्यायाम करें।
  • पर्याप्त नींद लें।
  • व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखें।

घरेलू उपाय कितने उपयोगी हैं?

अदरक, तुलसी, शहद और गर्म पेय पदार्थ गले को आराम देने और हल्की असुविधा कम करने में मदद कर सकते हैं।

हालाँकि, इन्हें इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। यदि बुखार लगातार बना रहे या तेज हो, तो डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।

किन गलतियों से बचना चाहिए?

मानसून में बुखार होने पर लोग अक्सर ये गलतियाँ करते हैं—

  • स्वयं दवा शुरू कर देना।
  • बिना सलाह के एंटीबायोटिक लेना।
  • पर्याप्त पानी न पीना।
  • आराम न करना।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना स्टेरॉयड लेना।
  • बुखार कम होते ही दवा बंद कर देना।
  • लंबे समय तक जांच न कराना।

ये सभी आदतें बीमारी को गंभीर बना सकती हैं।

मानसिक स्वास्थ्य का भी रखें ध्यान

बीमारी के दौरान तनाव और चिंता बढ़ सकती है। सकारात्मक वातावरण, परिवार का सहयोग और पर्याप्त आराम रोगी की रिकवरी में मदद करते हैं।

विशेषज्ञों की सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान किसी भी प्रकार के बुखार को हल्के में नहीं लेना चाहिए। यदि बुखार के साथ प्लेटलेट्स कम होना, साँस लेने में कठिनाई, लगातार उल्टी, बेहोशी या रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तत्काल अस्पताल जाना चाहिए।

साथ ही, बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा लेने से बचना चाहिए और जरूरत पड़ने पर आवश्यक जांच अवश्य करानी चाहिए।

मानसून का मौसम आनंददायक होने के साथ-साथ कई स्वास्थ्य चुनौतियाँ भी लेकर आता है। इस मौसम में होने वाला बुखार सामान्य वायरल संक्रमण से लेकर गंभीर बीमारियों तक का संकेत हो सकता है। इसलिए सही समय पर पहचान, पर्याप्त आराम, संतुलित भोजन, पर्याप्त तरल पदार्थ, स्वच्छता और चिकित्सकीय सलाह का पालन करना सबसे सुरक्षित उपाय है।cxcvv

विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। जागरूकता, समय पर उपचार और साफ-सफाई की आदतें अपनाकर मानसून के दौरान होने वाले अधिकांश संक्रमणों और उनसे जुड़ी जटिलताओं से प्रभावी रूप से बचा जा सकता है।

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राष्ट्रमंडल खेल 2026: ग्लासगो में भारतीय एथलीटों का ऐतिहासिक प्रदर्शन, नई पीढ़ी का आत्मविश्वास और वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ता परचम

ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 का रंगारंग समापन हो चुका है। दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित बहु-खेल प्रतियोगिताओं में से एक, कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय दल ने जबरदस्त साहस, तकनीकी कौशल और अटूट खेल भावना का परिचय देते हुए देश का नाम एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर गर्व से ऊंचा किया है। 23 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक स्कॉटलैंड के शहर ग्लासगो में आयोजित इस 11-दिवसीय खेल महाकुंभ में दुनिया भर के 74 राष्ट्रों के शीर्ष खिलाड़ियों ने भाग लिया।

इस बार ग्लासगो खेलों में कई प्रमुख पारंपरिक खेलों (जैसे कुश्ती, निशानेबाजी, बैडमिंटन, टेबल टेनिस और हॉकी) को शामिल नहीं किया गया था, जिससे भारत के संभावित पदक दावों को झटका लगने की आशंका जताई जा रही थी। हालांकि, भारतीय एथलीटों ने सीमित 10-खेल कार्यक्रमों के बीच एथलेटिक्स, मुक्केबाजी, भारोत्तोलन, जूडो और पैरा-स्पोर्ट्स में जो असाधारण प्रदर्शन दिखाया, उसने सभी कयासों को खारिज कर दिया। भारत ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य सहित कुल 39 पदक जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया।

1. ग्लासगो 2026 की अंतिम पदक तालिका (Medal Tally)

राष्ट्रमंडल खेल 2026 में ऑस्ट्रेलिया ने अपना पारंपरिक दबदबा कायम रखते हुए पहला स्थान प्राप्त किया। इंग्लैंड दूसरे और कनाडा तीसरे स्थान पर रहा, जबकि भारत ने मेजबान स्कॉटलैंड को पछाड़कर चौथा स्थान हासिल किया।

राष्ट्रमंडल खेल 2026: शीर्ष देशों की पदक तालिका

स्थान देश स्वर्ण (Gold) रजत (Silver) कांस्य (Bronze) कुल पदक (Total)
1 ऑस्ट्रेलिया (Australia) 70 45 56 171
2 इंग्लैंड (England) 29 45 36 110
3 कनाडा (Canada) 19 20 23 62
4 भारत (India) 13 17 9 39
5 स्कॉटलैंड (Scotland) 13 9 17 39
6 न्यूजीलैंड (New Zealand) 10 14 12 36
7 नाइजीरिया (Nigeria) 10 7 7 24
8 जमैका (Jamaica) 10 4 5 19

2. भारत के स्वर्ण पदक विजेताओं की पूरी सूची

ग्लासगो खेलों में भारत के 13 स्वर्ण पदक विजेताओं ने अलग-अलग खेलों में स्वर्णिम इतिहास रचा:

खिलाड़ी का नाम खेल / वर्ग पदक
साइखोम मीराबाई चानू भारोत्तोलन (महिला 48 किग्रा) स्वर्ण
शर्मिला धनखड़ पैरा-एथलेटिक्स (महिला शॉट पुट F57) स्वर्ण
दिलीप महादू गावित पैरा-एथलेटिक्स (पुरुष 100 मीटर T47) स्वर्ण
सोमन राणा पैरा-एथलेटिक्स (पुरुष शॉट पुट F57) स्वर्ण
अस्मिता दे जूडो (महिला 48 किग्रा) स्वर्ण
हर्ष सिंह जूडो (पुरुष 60 किग्रा) स्वर्ण
साक्षी चौधरी मुक्केबाजी (महिला 51 किग्रा) स्वर्ण
प्रीति पवार मुक्केबाजी (महिला 54 किग्रा) स्वर्ण
जैसमीन लाम्बोरिया मुक्केबाजी (महिला 57 किग्रा) स्वर्ण
प्रिया घनघास मुक्केबाजी (महिला 60 किग्रा) स्वर्ण
अरुंधति चौधरी मुक्केबाजी (महिला 70 किग्रा) स्वर्ण
सचिन सिवाच मुक्केबाजी (पुरुष 60 किग्रा) स्वर्ण
अंकुश पांघाल मुक्केबाजी (पुरुष 80 किग्रा) स्वर्ण

3. भारतीय रजत एवं कांस्य पदक विजेता

रजत पदक विजेता (17 Silver Medals)

  • भारोत्तोलन: ऋषिकांत सिंह (पुरुष 60 किग्रा), मुथुपंडी राजा (पुरुष 65 किग्रा), वल्लूरी अजय बाबू (पुरुष 79 किग्रा), ज्ञानेश्वरी यादव (महिला 53 किग्रा), हरजिंदर कौर (महिला 69 किग्रा), लवप्रीत सिंह (पुरुष +110 किग्रा)।

  • एथलेटिक्स: सर्वेश अनिल कुशारे (पुरुष हाई जंप), गुलवीर सिंह (पुरुष 10,000 मीटर), मुरली श्रीशंकर (पुरुष लॉन्ग जंप), नीरज चोपड़ा (पुरुष जैवलिन थ्रो), प्रवीण चित्रवेल (पुरुष ट्रिपल जंप)।

  • पैरा-एथलेटिक्स: मोहम्मद बासित (पुरुष 100 मीटर T47), शुभम जुयाल (पुरुष शॉट पुट F57)।

  • जूडो: यामिनी मौर्य (महिला 57 किग्रा)।

  • मुक्केबाजी: जादुमणि सिंह (पुरुष 55 किग्रा), लवलिना बोरगोहेन (महिला 75 किग्रा), नरेंद्र बेरवाल (पुरुष +90 किग्रा)।

कांस्य पदक विजेता (9 Bronze Medals)

  • पैरा पावरलिफ्टिंग: झांडू कुमार (पुरुष हैवीवेट)।

  • भारोत्तोलन: बिंद्यारानी देवी (महिला 58 किग्रा)।

  • पैरा-एथलेटिक्स: शिल्पा शैला (महिला शॉट पुट F57)।

  • एथलेटिक्स: गुलवीर सिंह (पुरुष 5,000 मीटर), सीमा कालीरमण (महिला डिस्कस थ्रो), यशवीर सिंह (पुरुष जैवलिन थ्रो), सेल्व प्रभु तिरुमारन (पुरुष ट्रिपल जंप), तेजस्विन शंकर (पुरुष डेकाथलन)।

4. प्रमुख खेलों में भारतीय दल का प्रदर्शन

(क) बॉक्सिंग (Boxing): रिंग में भारत का एकाधिकार

ग्लासगो में भारतीय मुक्केबाजों का प्रदर्शन ऐतिहासिक रहा। भारतीय बॉक्सरों ने कुल 10 पदक हासिल किए, जिनमें से 7 स्वर्ण पदक थे। साक्षी चौधरी, प्रीति पवार, जैसमीन लाम्बोरिया, प्रिया घनघास और अरुंधति चौधरी ने महिला वर्ग में अपनी आक्रामक तकनीक और मानसिक दृढ़ता से विरोधी खिलाड़ियों को पस्त किया। पुरुष वर्ग में सचिन सिवाच और अंकुश पांघाल ने स्वर्ण पदक जीतकर रिंग में भारत की धाक जमाई।

(ख) एथलेटिक्स और पैरा-एथलेटिक्स: ट्रैक एंड फील्ड में नए कीर्तिमान

  • गुलवीर सिंह: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के रहने वाले गुलवीर सिंह ने 10,000 मीटर दौड़ में रजत और 5,000 मीटर में कांस्य जीतकर एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स के दो लॉन्ग-डिस्टेंस ट्रैक इवेंट्स में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बनने का रिकॉर्ड बनाया।

  • नीरज चोपड़ा व यशवीर सिंह: ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने जैवलिन थ्रो में रजत पदक जीता, जबकि युवा एथलीट यशवीर सिंह ने कांस्य पदक अपने नाम किया।

  • पैरा-एथलीट्स का पराक्रम: पैरा-एथलेटिक्स में दिलीप महादू गावित (100 मीटर T47 स्वर्ण), शर्मिला धनखड़ (शॉट पुट स्वर्ण) और सोमन राणा (शॉट पुट स्वर्ण) ने भारत के पैरा-स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती को दर्शाया।

(ग) वेटलिफ्टिंग (Weightlifting): मीराबाई चानू के नेतृत्व में निरंतरता

टोक्यो ऑलंपिक पदक विजेता साइखोम मीराबाई चानू ने महिला 48 किग्रा वर्ग में अपनी श्रेणीबद्ध तकनीक और क्षमता का प्रदर्शन करते हुए लगातार स्वर्ण पदक बरकरार रखा। उनके साथ ऋषिकांत सिंह, मुथुपंडी राजा, ज्ञानेश्वरी यादव और हरजिंदर कौर ने रजत पदक जीतकर भारोत्तोलन टीम का दबदबा बनाए रखा।

(घ) जूडो (Judo): पहली बार ऐतिहासिक स्वर्णिम सफलता

राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो में भारत का सफर अब तक मुख्य रूप से रजत या कांस्य तक सीमित रहा था। लेकिन ग्लासगो 2026 में अस्मिता दे (48 किग्रा) और हर्ष सिंह (60 किग्रा) ने स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया।

5. भारत की तैयारी: दीर्घकालिक नीतियों का सफल प्रतिफल

इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे केंद्र सरकार के खेल मंत्रालय, स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) और राष्ट्रीय खेल महासंघों की दीर्घकालिक योजनाएं रही हैं:

  1. टार्गेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS): एथलीटों को विश्वस्तरीय व्यक्तिगत कोचिंग, उपकरण, विदेशी प्रशिक्षण और बायोमैकेनिकल विश्लेषण की सुविधा दी गई।

  2. स्पोर्ट्स साइंस और फिजियोथेरेपी: खिलाड़ियों की रिकवरी, न्यूट्रिशन और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेषज्ञों की टीम तैनात की गई।

  3. युवा प्रतिभा खोज (Khelo India): जमीनी स्तर पर प्रतिभा खोज अभियानों से निकलकर आए कई युवा एथलीटों ने ग्लासगो में अपनी प्रतिभा साबित की।

6. निष्कर्ष एवं भविष्य का दृष्टिकोण

ग्लासगो 2026 राष्ट्रमंडल खेल भारतीय खेल क्रांति के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक हैं। मुख्य पदकों वाले खेलों के न होने के बावजूद भारतीय एथलीटों का पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहना यह दर्शाता है कि भारत अब एक बहु-खेल (Multi-sport) राष्ट्र के रूप में उभर रहा है। यह सफलता आगामी एशियाई खेलों और 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए भारतीय खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।

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DurgapurBarrage: वाटर स्पोर्ट्स और इको-टूरिज्म से संवरेगा पर्यटन नक्शा!!!

Durgapur Barrage:पश्चिम बंगाल सरकार दुर्गापुर बैराज को राज्य के पर्यटन मानचित्र पर प्रमुखता से स्थापित करने के लिए एक नई योजना पर काम कर रही है। आधुनिक पर्यटकों की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए, प्रशासन बैराज क्षेत्र में वाटर स्पोर्ट्स और इको-टूरिज्म विकसित करने की संभावनाओं की समीक्षा कर रहा है।

मुख्य पहल और भावी योजनाएं

आधुनिक वाटर स्पोर्ट्स: सर्फिंग, वाटर पोलो और वाटर बास्केटबॉल जैसे खेलों की संभावनाओं का आकलन करने के लिए पर्यटन विभाग ने पश्चिम बर्धमान के जिलाधिकारी (DM) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

इको-टूरिज्म और कॉटेज: बैराज के आसपास के प्राकृतिक सौंदर्य को निखारते हुए कॉटेज निर्माण और इको-टूरिज्म विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। योजना व्यावहारिक पाए जाने पर एक ‘डीपीआर’ (Detailed Project Report) तैयार की जाएगी।

राढ़ेश्वर शिव मंदिर का जीर्णोद्धार: दुर्गापुर के ऐतिहासिक राढ़ेश्वर शिव मंदिर के विकास और इसे ‘हेरिटेज इको-टूरिज्म’ स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में भी प्रशासनिक स्तर पर रिपोर्ट मांगी गई है।

बीरभानपुर नहर का उपयोग: स्थानीय प्रस्तावों के अनुसार, वीरभानपुर स्थित नहर को एक बड़े जल भंडार (Water Reservoir) के रूप में विकसित कर वहां वाटर स्पोर्ट्स शुरू किया जा सकता है। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ जल संरक्षण और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

राज्य सरकार का यह कदम न केवल दुर्गापुर और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन को एक नई दिशा देगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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International Friendship Day:कोलकाता में ‘एक दुनिया’ की शानदार पहल!!! ‘बंधुर बंधन’ का सफल आयोजन!!!

International Friendship Day:अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस (International Friendship Day) के खास मौके पर, कोलकाता के साल्ट लेक स्थित प्रतिष्ठित ‘द स्टैडल’ (The Stadel) होटल में एक बेहद प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ‘एक दुनिया’ संस्था द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का नाम ‘बंधुर बंधन’ रखा गया था। इस भव्य आयोजन ने समाज को यह संदेश दिया कि मित्रता केवल एक व्यक्तिगत रिश्ता नहीं है, बल्कि यह समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का एक मजबूत माध्यम है।

मानवीय मूल्य और तकनीक का अनोखा संगम

इस पूरे आयोजन का मुख्य उद्देश्य केवल जश्न मनाना नहीं था, बल्कि मानवीय मूल्यों, आधुनिक तकनीक और लोगों के दिलों को एक साथ जोड़ना था। आज के डिजिटल युग में जहाँ दूरियां सिमट रही हैं, वहीं मानवीय संवेदनाओं को सहेज कर रखना भी उतना ही जरूरी है। ‘बंधुर बंधन’ ने इसी विचारधारा को मंच प्रदान किया।

मलॉय पीट की प्रेरणादायक सोच

कार्यक्रम के दौरान मलॉय पीट के विचार विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहे। उन्होंने तकनीक को देखने का एक नया नजरिया पेश करते हुए कहा:

तकनीक केवल बातचीत करने या संचार का एक साधारण माध्यम नहीं है; यह वास्तव में लोगों के बीच विश्वास, गहरे जुड़ाव और समग्र विकास का एक बेहद शक्तिशाली पुल है।”

उनकी यह सोच स्पष्ट करती है कि डिजिटल युग में इंसानियत और मशीनों के बीच एक संतुलन बनाकर ही हम एक बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।

एक दुनिया’ का विजन: एक सशक्त और डिजिटल भविष्य

‘एक दुनिया’ सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि एक व्यापक दृष्टिकोण है। उनका मूल मंत्र है— एक पृथ्वी • एक दृष्टिकोण • एक डिजिटल भविष्य।

यह संस्था डिजिटल तकनीक की असीम ताकत को समाज के हर वर्ग और हर आम इंसान की पहुंच तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। विकास को गति देने के लिए ‘एक दुनिया’ मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रही है:

स्वास्थ्य सेवा (Healthcare): सुलभ और उन्नत मेडिकल सुविधाएं।

शिक्षा (Education): हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण ज्ञान का प्रसार।

रोजगार (Employment): युवाओं के लिए नए अवसरों का सृजन।

पर्यटन (Tourism): संस्कृति और स्थानों को डिजिटल रूप से बढ़ावा देना।

कौशल विकास (Skill Development): भविष्य की चुनौतियों के लिए युवाओं को तैयार करना।

सामाजिक जुड़ाव (Social Connection): समाज के हर तबके को एक साथ लाना।

निष्कर्ष: विकास की नई शक्ति

‘बंधुर बंधन’ कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि जब इंसानियत और तकनीक मिलते हैं, तो विकास की नई राहें खुलती हैं। मित्रता सिर्फ एक भावना या संबंध तक सीमित नहीं है, यह बदलाव, सहयोग और सामूहिक विकास की एक नई शक्ति है।

कार्यक्रम का समापन इसी खूबसूरत संकल्प के साथ हुआ:

एक दुनिया — एक बंधन, एक सपना, एक भविष्य।

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Commonwealth Games:कॉमनवेल्थ टेबल टेनिस में भारत का डंका!!!पुरुष और महिला दोनों टीमों ने जीता स्वर्ण, एशियन गेम्स से पहले बढ़ा हौसला!!!

Commonwealth Games :एशियन गेम्स की तैयारियों में जुटी भारतीय टेबल टेनिस टीम के लिए दिल्ली से एक बेहद शानदार और राहत भरी खबर सामने आई है। त्यागराज स्टेडियम में आयोजित ‘कॉमनवेल्थ टेबल टेनिस चैंपियनशिप’ में भारतीय खिलाड़ियों ने अपना दबदबा कायम रखते हुए पुरुष और महिला—दोनों टीम इवेंट्स में स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया है।

दोनों ही श्रेणियों के फाइनल मुकाबले में भारत का सामना मलेशिया से था, जहाँ भारतीय पैडलर्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दोहरे सोने पर कब्जा जमाया।

1. महिला टीम की एकतरफा जीत (3-0)

महिला वर्ग के फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने मलेशियाई खिलाड़ियों को संभलने का कोई मौका नहीं दिया और 3-0 से एकतरफा जीत दर्ज की।

पहला मैच: स्वस्तिका घोष ने एई शिन टी को 11-7, 11-2, 9-11, 11-9 से हराकर भारत को शुरुआती बढ़त दिलाई।

दूसरा मैच: श्रीजा अकुला ने कड़े मुकाबले में कैरेन अनक को 9-11, 11-6, 11-4, 5-11, 11-3 से परास्त किया।

तीसरा मैच: यशस्वीनी घोरपड़े ने एलिस ली के खिलाफ 7-11, 11-3, 17-15, 11-5 से मुकाबला जीतकर भारत की खिताबी जीत पर मुहर लगा दी।

पुरानी हार का हिसाब चुकता: बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स के क्वार्टर फाइनल में भारतीय महिला टीम को मलेशिया के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। इस शानदार जीत के साथ श्रीजा और उनकी टीम ने उस हार का हिसाब भी बराबर कर लिया। इस टीम में सुतीर्था मुखर्जी और सिंड्रेला दास भी शामिल थीं, हालांकि वे फाइनल मैच में नहीं उतरीं।

2. पुरुष टीम का रोमांचक मुकाबला (3-2)

महिला टीम के विपरीत, भारतीय पुरुष टीम को स्वर्ण पदक तक पहुँचने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। मुकाबला आखिरी मैच तक गया, जहाँ भारत ने 3-2 से रोमांचक जीत दर्ज की।

शुरुआती बढ़त: मानव ठक्कर और मानुष शाह ने अपने-अपने एकल मैच जीतकर भारत को 2-0 की मजबूत बढ़त दिलाई। मानव ने जावेन चुंग और मानुष ने किउ शेन ओंग को हराया।

मलेशिया की वापसी: इसके बाद जी. साथियान और मानव ठक्कर अपने-अपने मैच हार गए, जिससे मलेशिया ने 2-2 से बराबरी कर ली।

निर्णायक मुकाबला: दबाव के क्षणों में मानुष शाह ने शानदार खेल दिखाया और निर्णायक मैच में चुंग को सीधे सेटों में 11-7, 11-4, 11-4 से हराकर भारत की झोली में दूसरा सोना डाल दिया।

एशियन गेम्स से पहले बढ़ा मनोबल

बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद इस बार मुख्य गेम्स से टेबल टेनिस को हटा दिया गया था, लेकिन ग्लासगो में गेम्स के दौरान ही दिल्ली में इस चैंपियनशिप का आयोजन किया गया।

भारतीय टीम की इस दोहरी सफलता पर कोच सौरभ चक्रवर्ती ने खुशी जताते हुए कहा:

“टीम में कई युवा खिलाड़ी शामिल हैं। ऐसे युवा खिलाड़ियों के साथ कॉमनवेल्थ स्तर पर चैंपियन बनना बेहद सकारात्मक संकेत है। आगामी एशियन गेम्स से ठीक पहले मिली यह जीत पूरी टीम के आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ाएगी।”

टीम इवेंट्स में ऐतिहासिक सफलता हासिल करने के बाद, भारतीय खिलाड़ी अब सिंगल्स और डबल्स कैटेगरी के मुकाबलों में अपना जलवा दिखाने के लिए मैदान में उतरेंगे।

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