Homeब्लॉगKhadan Dungri: प्रकृति का कैनवास!!!

Khadan Dungri: प्रकृति का कैनवास!!!

Khadan Dungri:बेलपहाड़ी ब्लॉक के ओदलचुआ गांव के पास स्थित यह पहाड़ सैलानियों के लिए आकर्षण का नया केंद्र बन गया है। इस पहाड़ की खासियत इसकी चट्टानें हैं, जो कुदरती तौर पर लाल, नीली, पीली और सुनहरी परतों में बंटी हुई हैं। ऐसा लगता है मानो किसी कलाकार ने बड़े ही जतन से इन पत्थरों को रंगों से सजाया हो।

 

प्रमुख विशेषताएं:

अनोखा रंग: धूप पड़ते ही ये चट्टानें सोने की तरह चमकने लगती हैं।

प्राकृतिक विरोधाभास: झारग्राम की सूखी लाल मिट्टी के बीच इन रंग-बिरंगे पत्थरों का होना एक जादुई अनुभव पैदा करता है।

सूर्यास्त का जादू: शाम के समय जब ढलते सूरज की किरणें इन चट्टानों पर पड़ती हैं, तो पूरा परिदृश्य मायावी लगने लगता है।

 

ऑस्ट्रेलिया के ‘उलुरु’ से तुलना

दुनिया भर में ऑस्ट्रेलिया का उलुरु माउंटेन अपनी बदलती रंगत के लिए मशहूर है। जानकारों और पर्यटकों का मानना है कि भारत में ऐसी अद्भुत छटा और कहीं नहीं देखी गई। घने जंगलों के बीच से होकर गुजरने वाला रास्ता इस यात्रा को और भी रोमांचक और ‘ऑफबीट’ बनाता है।

कैसे पहुँचें?

अगर आप भी इस सप्ताह के अंत में (Weekend Trip) कुछ अलग देखना चाहते हैं, तो खादान डुंगरी एक बेहतरीन विकल्प है।

माध्यम मार्ग की जानकारी

रेल मार्ग हावड़ा से ट्रेन पकड़कर झारग्राम स्टेशन उतरें।

सड़क मार्ग झारग्राम शहर से इसकी दूरी लगभग 45-55 किलोमीटर है।

स्थानीय सफर झारग्राम से गाड़ी किराए पर लेकर बेलपहाड़ी होते हुए ओदलचुआ गांव पहुँचें।

नोट: ओदलचुआ गांव पहुँचने के बाद आपको थोड़ा पैदल चलकर जंगल के रास्ते से पहाड़ तक जाना होगा। रास्ता भटकने पर स्थानीय ग्रामीण आपकी मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।

निष्कर्ष

उत्तर बंगाल के पहाड़ों से हटकर, दक्षिण बंगाल का यह हिस्सा शांति और प्राकृतिक सुंदरता की नई परिभाषा लिख रहा है। अगर आप भीड़भाड़ से दूर किसी शांत और रहस्यमयी जगह की तलाश में हैं, तो खादान डुंगरी यानी बंगाल का ‘रंगीन पहाड़’ आपकी बकेट लिस्ट में जरूर होना चाहिए।

और पढ़ें:बंगला सन के वास्तविक प्रवर्तक महाराजा शशांक: इतिहास के आईने में बंगाब्द की उत्पत्ति!!!

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments