Hydrogen Train:भारतीय रेलवे ने पर्यावरण के अनुकूल (eco-friendly) परिवहन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। देश की पहली हाइड्रोजन संचालित ट्रेन (Hydrogen Train) को रेलवे बोर्ड से हरी झंडी मिल चुकी है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से बनी यह ट्रेन जल्द ही पटरियों पर दौड़ती नजर आएगी। भारतीय रेलवे का दावा है कि ब्रॉडगेज नेटवर्क पर यह दुनिया की सबसे लंबी और सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन होगी।
आइए जानते हैं भारत की इस अनूठी ट्रेन के रूट, तकनीक और इसकी खासियतों के बारे में।
किस रूट पर चलेगी यह ट्रेन?
इस आधुनिक ट्रेन के परिचालन के लिए हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट को चुना गया है। भारतीय रेलवे इस रूट पर इसके सभी जरूरी ट्रायल रन (परीक्षण) पहले ही सफलतापूर्वक पूरे कर चुका है, जिसके बाद इसे अंतिम मंजूरी दी गई है।
जींद-सोनीपत रूट को ही क्यों चुना गया?
वर्तमान में भारतीय रेलवे का लगभग 99.2% ब्रॉडगेज नेटवर्क बिजली से चलता है (Electrified है)। इसलिए हाइड्रोजन ट्रेन को इलेक्ट्रिक ट्रेनों के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि उन दुर्गम और पहाड़ी इलाकों के लिए तैयार किया जा रहा है जहाँ ओवरहेड बिजली की लाइनें (OHE) बिछाना बेहद कठिन या असंभव होता है।
कैसे काम करती है यह ‘ग्रीन’ तकनीक?
आसान शब्दों में कहें तो यह ट्रेन चलते समय खुद ही अपने लिए बिजली पैदा करती है। इसमें पारंपरिक इंजनों की तरह डीजल की जरूरत नहीं होती।
हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक: ट्रेन में लगे फ्यूल सेल के अंदर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच एक रासायनिक प्रक्रिया (Chemical Reaction) होती है।
शून्य प्रदूषण: इस प्रक्रिया के जरिए बिजली (Electricity) पैदा होती है जिससे ट्रेन चलती है। सबसे अच्छी बात यह है कि इससे कोई हानिकारक धुआं या कार्बन नहीं निकलता। उप-उत्पाद (By-product) के रूप में केवल पानी की भाप (Water Vapor) बाहर निकलती है, जो इसे 100% पर्यावरण के अनुकूल बनाती है।
ट्रेन की मुख्य विशेषताएं और क्षमता
इस स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन में यात्रियों की सुविधा और रफ्तार दोनों का पूरा ध्यान रखा गया है:
विशेषता विवरण
कोच की संख्या कुल 10 कोच (8 यात्री कोच + 2 ड्राइविंग पावर कार)
पावर क्षमता 1,200 किलोवाट (kW) क्षमता का हाइड्रोजन फ्यूल सेल सिस्टम
रफ़्तार (Speed) कमर्शियल रन के दौरान 75 किमी/घंटा (ट्रायल के दौरान अधिकतम 120 किमी/घंटा)
रेंज (एक बार रिफ्यूलिंग पर) एक बार हाइड्रोजन भरने पर यह ट्रेन लगभग 250 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती है
ट्रेन के अंदर ही हाइड्रोजन सिलेंडर, फ्यूल सेल, एडवांस बैटरी बैकअप और कंट्रोल सिस्टम के लिए एक विशेष और सुरक्षित जगह तैयार की गई है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और स्वदेशी निर्माण
चूंकि हाइड्रोजन एक अत्यधिक ज्वलनशील गैस है, इसलिए इस ट्रेन में सुरक्षा का स्तर सबसे ऊंचा रखा गया है। ट्रेन के आगे की तरफ 27 और पीछे की तरफ 27 विशेष हाइड्रोजन सिलेंडर लगाए गए हैं। इसके साथ ही, देश में ही इसके लिए सुरक्षित हाइड्रोजन स्टोरेज और रिफ्यूलिंग स्टेशन भी विकसित किए गए हैं।
यह पूरी ट्रेन पूरी तरह ‘मेड इन इंडिया’ है। इसका डिजाइन लखनऊ के अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (RDSO) ने तैयार किया है, जबकि इसका निर्माण चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में किया गया है। जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे चुनिंदा देशों के बाद अब भारत भी इस तकनीक वाले देशों के एलीट क्लब में शामिल हो गया है।


