Coconut Production :नारियल और डाब (हरा नारियल) के उत्पादन में भारत ने विश्व मंच पर अपनी श्रेष्ठता साबित करते हुए एक नया इतिहास रच दिया है। नारियल खेती के लिए उपलब्ध भूमि के मामले में भारत भले ही विश्व स्तर पर तीसरे स्थान पर आता हो, लेकिन अपनी उच्च उत्पादकता के दम पर भारत दुनिया में सबसे बड़ा नारियल उत्पादक देश बन गया है।
उत्पादन के आंकड़े और प्रमुख राज्यों की भूमिका
वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में नारियल की औसत उत्पादकता प्रति हेक्टेयर 9,259 नारियल (लगभग 10,000) रही, जिससे कुल उत्पादन 20,301 मिलियन नारियल तक पहुंच गया। इस रिकॉर्ड पैदावार में देश के विभिन्न राज्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है:
राज्य योगदान और स्थिति
केरल सबसे अधिक 7.54 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि के साथ नारियल खेती का मुख्य केंद्र।
आंध्र प्रदेश उच्च उत्पादकता की दर में देश में सबसे आगे।
पश्चिम बंगाल पूर्वोत्तर भारत से देश के कुल उत्पादन को मजबूत आधार देने वाला अग्रणी राज्य।
तमिलनाडु बड़े पैमाने पर खेती और निरंतर उच्च उत्पादन क्षमता।
भविष्य के लक्ष्य और सरकारी योजनाएं
उत्पादन क्षमता को और बढ़ाने के लिए इस वर्ष 2,175 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को नारियल की खेती के तहत शामिल किया गया है। केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र के विकास और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बड़े लक्ष्य तय किए हैं:
बजट प्रावधान (2026-27): ‘नारियल उत्पादन योजना’ (Coconut Production Scheme) को मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने और निर्यात पर विशेष जोर देने का प्रावधान।
2030 का लक्ष्य: नारियल और इससे जुड़े उत्पादों के निर्यात को 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना।
2047 का दीर्घकालिक लक्ष्य: आजादी के अमृत काल तक नारियल निर्यात को 21 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर ले जाना।
कृषि विशेषज्ञों और वैश्विक एजेंसियों के सहयोग से भारत का यह क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और वैश्विक बाजार में देश का वर्चस्व कायम रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
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