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दो बार मिली हार, पर नहीं मानी हार: मोटी तनख्वाह वाली नौकरी छोड़ विशाखा यादव ऐसे बनीं IAS टॉपर

IAS Vishakha Yadav: कहते हैं कि मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है। दिल्ली की विशाखा यादव की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है, जहाँ लाखों में से कुछ ही छात्र सफल हो पाते हैं। विशाखा ने न केवल इस कठिन परीक्षा को पास किया, बल्कि शुरुआती असफलताओं को पछाड़ते हुए ऑल इंडिया रैंक 6 हासिल कर एक मिसाल कायम की।

इंजीनियरिंग से प्रशासनिक सेवा तक का सफर

विशाखा की शैक्षणिक पृष्ठभूमि काफी मजबूत रही है। उन्होंने दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। स्नातक होने के बाद, उनका चयन बेंगलुरु में सिस्को (Cisco) जैसी दिग्गज बहुराष्ट्रीय कंपनी में हो गया। वहाँ वे एक शानदार पैकेज और आरामदायक जीवन जी रही थीं।

लेकिन, विशाखा के मन में कुछ और ही चल रहा था। वे अपनी सुख-सुविधाओं वाली नौकरी से संतुष्ट तो थीं, लेकिन उन्हें महसूस हुआ कि वे सीधे तौर पर समाज और प्रशासन तंत्र का हिस्सा बनकर लोगों की मदद करना चाहती हैं। इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने एक बड़ा जोखिम उठाया और अपनी मोटी तनख्वाह वाली नौकरी से इस्तीफा दे दिया।

विफलता ने ली कड़ी परीक्षा

UPSC की राह कभी आसान नहीं होती। विशाखा ने जब तैयारी शुरू की, तो शुरुआती दो प्रयासों में उन्हें करारा झटका लगा। वे लगातार दो बार प्रीलिम्स (प्रारंभिक परीक्षा) भी पास नहीं कर पाईं। किसी भी अभ्यर्थी के लिए यह मानसिक रूप से तोड़ देने वाला समय होता है। कई लोग इस मोड़ पर आकर हार मान लेते हैं और वापस कॉर्पोरेट जगत की ओर रुख कर लेते हैं।

लेकिन विशाखा ने हार मानने के बजाय अपनी गलतियों का विश्लेषण किया। उन्होंने समझा कि उनकी तैयारी में कहाँ कमी रह गई थी और तीसरे प्रयास के लिए एक नई रणनीति तैयार की।

परिवार बना सबसे बड़ी ताकत

विशाखा के इस संघर्षपूर्ण सफर में उनके परिवार ने रीढ़ की हड्डी की तरह काम किया। उनके पिता, राजकुमार यादव, दिल्ली पुलिस में सहायक उप-निरीक्षक (ASI) हैं और उनकी माता सरिता यादव ने हर कदम पर उनका मनोबल बढ़ाया। जब भी विशाखा असफलताओं से निराश होतीं, उनके माता-पिता का अटूट विश्वास उन्हें फिर से उठ खड़े होने की शक्ति देता।

तीसरे प्रयास में रचा इतिहास

अपनी कड़ी मेहनत, अनुशासन और पिछली गलतियों से सीख लेते हुए विशाखा ने तीसरे प्रयास में परीक्षा दी। इस बार न केवल उन्होंने प्रीलिम्स और मेन्स क्लियर किया, बल्कि इंटरव्यू में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए AIR-6 हासिल की। उनकी यह उपलब्धि उन सभी उम्मीदवारों के लिए एक संदेश है जो शुरुआती विफलताओं से डर जाते हैं।

सीख: विशाखा यादव की कहानी हमें सिखाती है कि यदि आपके पास एक स्पष्ट लक्ष्य और उसे पाने का दृढ़ संकल्प है, तो कोई भी असफलता स्थायी नहीं होती।

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