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शांतिनिकेतन मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में डॉ. श्रीजित नारायण चौधुरी द्वारा ‘एनेटॉमी’ पर व्याख्यान मानव शारीरिक रचनाओं का गहन विश्लेषण: डॉ. श्रीजित नारायण चौधुरी का ज्ञानवर्धक सत्र

Lecture on ‘Anatomy’ by Dr. Sreejit Narayan Choudhury: शांतिनिकेतन मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हाल ही में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ज्ञानवर्धक व्याख्यान आयोजित किया गया, जिसमें शारीरिक रचनाओं (Anatomy) के विषय पर चर्चा की गई। यह व्याख्यान प्रसिद्ध शारीरिक विज्ञानी और शिक्षाविद डॉ. श्रीजित नारायण चौधुरी ने प्रस्तुत किया। इस सत्र का उद्देश्य चिकित्सा छात्रों को मानव शरीर की संरचना, उसके अंगों, और उनके कार्यों के बारे में गहरी समझ देना था। डॉ. चौधुरी का यह व्याख्यान न केवल चिकित्सा की बुनियादी समझ को बढ़ाने के लिए था, बल्कि यह छात्रों को शारीरिक रचनाओं और उनके कार्यों के बीच के रिश्तों को समझने में भी मदद करने वाला था।

डॉ. श्रीजित नारायण चौधुरी का परिचय

डॉ. श्रीजित नारायण चौधुरी शारीरिक विज्ञान (Anatomy) के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित और सम्मानित नाम हैं। वे लंबे समय से चिकित्सा शिक्षा और शोध से जुड़े हुए हैं और उन्होंने हजारों छात्रों को शारीरिक रचनाओं के अध्ययन में प्रशिक्षित किया है। उनकी शिक्षण शैली अत्यंत प्रभावशाली है, क्योंकि वे जटिल शारीरिक अवधारणाओं को सरल और स्पष्ट तरीके से समझाते हैं। डॉ. चौधुरी का मानना है कि शारीरिक विज्ञान केवल अंगों और कोशिकाओं के अध्ययन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन की पूरी समझ को बढ़ाने का एक अहम हिस्सा है।

व्याख्यान का उद्देश्य

इस व्याख्यान का मुख्य उद्देश्य छात्रों को शरीर की संरचना और कार्यप्रणाली के बारे में विस्तृत जानकारी देना था। डॉ. चौधुरी ने यह बताया कि शारीरिक रचनाओं का अध्ययन केवल शरीर के अंगों की स्थिति जानने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह यह समझने का तरीका है कि शरीर के अंग कैसे एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करते हैं। उन्होंने छात्रों को यह समझने में मदद की कि शारीरिक संरचनाओं की गहरी समझ के बिना, चिकित्सक के लिए रोगों का निदान और इलाज करना अत्यंत कठिन हो सकता है।

“चिकित्सा का एक बहुत बड़ा हिस्सा शरीर की संरचना को समझना है,” डॉ. चौधुरी ने अपने व्याख्यान में कहा। “आप जितना अधिक शारीरिक रचनाओं के बारे में जानेंगे, उतना ही आप अपने रोगियों का बेहतर इलाज कर पाएंगे।”

व्याख्यान में प्रमुख विषयों पर चर्चा

  1. शरीर की संरचना और अंगों का कार्यडॉ. चौधुरी ने सबसे पहले शरीर के विभिन्न अंगों और उनके कार्यों पर विस्तृत रूप से चर्चा की। उन्होंने शरीर को कोशिकाओं, ऊतकों, अंगों और अंग तंत्रों के स्तर पर समझाया। वे बताते हैं कि हर अंग अपनी संरचना और कार्य के हिसाब से शरीर के अन्य अंगों के साथ मिलकर कार्य करता है। उदाहरण के तौर पर, जब डॉ. चौधुरी ने दिल के बारे में बताया, तो उन्होंने समझाया कि दिल का चार कक्षों वाला संरचनात्मक रूप उसे रक्त को पूरे शरीर में सही तरीके से पंप करने में मदद करता है। इसी तरह, फेफड़ों और गुर्दे की संरचना और उनके कार्यों के बारे में भी उन्होंने छात्रों को बताया।
  2. तंत्रिका तंत्र (Nervous System)डॉ. चौधुरी ने तंत्रिका तंत्र की संरचना और कार्य पर भी महत्वपूर्ण चर्चा की। उन्होंने बताया कि मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और तंत्रिकाओं का नेटवर्क शरीर के सभी अंगों के बीच सूचना का आदान-प्रदान करता है। मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र की संरचना और कार्य में गहरी समझ से, छात्रों को यह समझने में मदद मिलती है कि शरीर में विभिन्न कार्य कैसे नियंत्रित होते हैं, जैसे कि गति, संवेदनाएं, और शरीर के आंतरिक तंत्रों का संतुलन।
  3. आंतरिक अंगों के आपसी संबंधडॉ. चौधुरी ने यह भी बताया कि शरीर के विभिन्न अंग एक-दूसरे से कैसे जुड़े होते हैं और उनका आपसी संबंध कैसे कार्य करता है। जैसे कि पाचन तंत्र, जो भोजन को तोड़ता है और उसे शरीर के विभिन्न अंगों तक पोषण के रूप में पहुंचाता है, उसे समझने के लिए शारीरिक रचनाओं का ज्ञान आवश्यक है। डॉ. चौधुरी के अनुसार, अंगों के बीच के रिश्ते और उनका आपसी सहयोग, शरीर की कार्यप्रणाली को सही तरीके से समझने के लिए आवश्यक हैं।
  4. शरीर में रक्त परिसंचरण (Circulatory System)रक्त परिसंचरण प्रणाली के बारे में डॉ. चौधुरी ने बताया कि शरीर के हर अंग तक पोषक तत्व और ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए रक्त का सही तरीके से प्रवाह आवश्यक है। दिल के कार्य को समझते हुए, उन्होंने रक्त वाहिकाओं, शिराओं और धमनियों की संरचना और कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी अंग में रक्त का प्रवाह बाधित हो जाए तो शरीर में किस प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जैसे कि हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, और स्ट्रोक।
  5. चिकित्सा में शारीरिक रचनाओं का महत्वव्याख्यान के दौरान डॉ. चौधुरी ने यह भी बताया कि शारीरिक विज्ञान केवल मेडिकल छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि चिकित्सकीय क्षेत्र के अन्य विशेषज्ञों के लिए भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है। “जब आप किसी भी रोगी का इलाज करते हैं, तो आपको शरीर की संरचना का ज्ञान होना चाहिए। अगर आप नहीं जानते कि अंग कैसे काम करते हैं, तो आप इलाज में सफल नहीं हो सकते,” डॉ. चौधुरी ने छात्रों को समझाया।

व्याख्यान में छात्रों की सक्रिय भागीदारी

डॉ. चौधुरी ने व्याख्यान के अंत में छात्रों से सवाल-जवाब सत्र का आयोजन किया, जिसमें छात्रों ने अपने शारीरिक विज्ञान से संबंधित सवाल पूछे और डॉ. चौधुरी ने धैर्यपूर्वक उन सवालों का उत्तर दिया। छात्रों ने इस सत्र से न केवल शारीरिक रचनाओं के बारे में गहरी समझ हासिल की, बल्कि उन्हें यह भी समझ में आया कि शारीरिक विज्ञान का अध्ययन चिकित्सकीय निर्णयों को बेहतर बनाने के लिए कितना आवश्यक है।

शांतिनिकेतन मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में डॉ. श्रीजित नारायण चौधुरी द्वारा आयोजित यह व्याख्यान मेडिकल छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण शिक्षा का अवसर था। शारीरिक विज्ञान के महत्व और उसकी चिकित्सा के क्षेत्र में उपयोगिता को समझने के लिए यह सत्र अत्यंत लाभकारी साबित हुआ। डॉ. चौधुरी ने छात्रों को यह समझने में मदद की कि शारीरिक रचनाओं का अध्ययन केवल मेडिकल शिक्षा का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह उन्हें अधिक सशक्त चिकित्सक बनने में भी मदद करेगा।

व्याख्यान के दौरान दी गई जानकारी और छात्रों की सक्रिय भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि शारीरिक विज्ञान का ज्ञान डॉक्टरों के लिए आवश्यक है, ताकि वे रोगियों के सही इलाज के लिए सही निर्णय ले सकें। डॉ. चौधुरी के इस सत्र से छात्रों को एक नया दृष्टिकोण मिला और उन्हें शारीरिक रचनाओं का अध्ययन करने के लिए प्रेरणा मिली।

और पढ़ें: “डॉ. त्रिदिबेश्वर मंडल द्वारा असामान्य मूत्र घटकों पर लाइव व्याख्यान – शांतिनिकेतन मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल”

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