34 सप्ताह में जन्मे नवजात को मिली आपातकालीन जीवनरक्षक चिकित्सा
शांतिनिकेतन मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में NICU टीम की तत्परता से गंभीर श्वसन जटिलता पर पाया गया नियंत्रण
जन्म के कुछ ही मिनटों बाद गंभीर सांस लेने की समस्या से जूझ रहे 34 सप्ताह के एक नवजात शिशु को शांतिनिकेतन मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में आपातकालीन और गहन चिकित्सा देकर स्थिर करने का प्रयास किया गया। समय से पहले जन्मे इस नवजात को जन्म के तुरंत बाद अस्पताल की Neonatal Intensive Care Unit (NICU) में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों की लगातार निगरानी में उसका उपचार शुरू किया गया।
शिशु को पहले ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया, लेकिन कुछ समय बाद उसकी सांस संबंधी परेशानी बढ़ने लगी और रक्त में ऑक्सीजन का स्तर गिरने लगा। स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे CPAP यानी Continuous Positive Airway Pressure पर रखा। जांच के दौरान छाती के एक्स-रे में निमोनिया के अनुरूप संकेत दिखाई दिए, जिसके बाद आवश्यक एंटीबायोटिक्स, नस के माध्यम से तरल पदार्थ और श्वसन संबंधी सहायता जारी रखी गई।
हालांकि शुरुआती दौर में नवजात की स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर रही, लेकिन 27 अगस्त की सुबह अचानक उसके रक्त में ऑक्सीजन का स्तर फिर गिरने लगा। तत्काल चिकित्सकीय जांच और दोबारा किए गए चेस्ट एक्स-रे में दाहिनी ओर pneumothorax की गंभीर स्थिति सामने आई। इसके बाद अस्पताल की चिकित्सा टीम ने बिना समय गंवाए आपातकालीन हस्तक्षेप किया।
पहला चरण: समय से पहले हुआ जन्म
बोलपुर, बीरभूम की निवासी श्रीमती सुष्मिता दास के पुत्र का जन्म 25 अगस्त 2026 को रात लगभग 9 बजे Caesarean Section के माध्यम से हुआ।
बच्चे का जन्म गर्भावस्था के 34वें सप्ताह में हुआ, इसलिए उसे समय से पहले जन्मा नवजात माना गया। जन्म के बाद कुछ ही मिनटों में बच्चे को सांस लेने में कठिनाई होने लगी।
नवजात में सांस संबंधी परेशानी को देखते हुए अस्पताल के चिकित्सकों ने तत्काल उसे NICU में स्थानांतरित किया। यहां उसका लगातार निरीक्षण शुरू किया गया ताकि उसकी सांस, रक्त में ऑक्सीजन और अन्य महत्वपूर्ण शारीरिक संकेतकों में होने वाले किसी भी परिवर्तन का तुरंत पता लगाया जा सके।
समय से पहले जन्म लेने वाले शिशुओं में शरीर के विभिन्न अंगों की पूर्ण परिपक्वता नहीं होने के कारण अतिरिक्त चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है। इस मामले में भी जन्म के तुरंत बाद श्वसन संबंधी समस्या प्रमुख चुनौती बन गई।
दूसरा चरण: ऑक्सीजन सपोर्ट से शुरू हुआ उपचार
NICU में पहुंचने के बाद बच्चे को प्रारंभिक रूप से ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया। चिकित्सकों ने उसके श्वसन की स्थिति और रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा की निगरानी शुरू की।
लेकिन कुछ समय बाद बच्चे की सांस लेने में परेशानी बढ़ने लगी। इसके साथ ही उसकी oxygen saturation में भी गिरावट देखी गई।
स्थिति को देखते हुए केवल सामान्य ऑक्सीजन सहायता पर्याप्त नहीं मानी गई। चिकित्सकों ने नवजात को CPAP सपोर्ट देने का निर्णय लिया।
CPAP एक non-invasive respiratory support प्रणाली है, जिसमें नियंत्रित दबाव के साथ वायु प्रवाह देकर श्वसन मार्ग को खुला रखने और सांस लेने में सहायता करने का प्रयास किया जाता है। नवजात की तत्काल स्थिति को देखते हुए इसे उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया।
तीसरा चरण: चेस्ट एक्स-रे में सामने आए संक्रमण के संकेत
बच्चे की लगातार श्वसन संबंधी परेशानी को देखते हुए चिकित्सकों ने chest X-ray कराने का निर्णय लिया।
जांच की रिपोर्ट में निमोनिया के अनुरूप संकेत दिखाई दिए। इसके बाद उपचार में उपयुक्त antibiotics शामिल किए गए। साथ ही बच्चे को intravenous fluids और लगातार respiratory support दिया जाता रहा।
NICU में बच्चे की स्थिति की लगातार निगरानी की जाती रही। शुरुआती उपचार के दौरान उसकी हालत अपेक्षाकृत स्थिर बनी रही, लेकिन चिकित्सकों ने उसे उच्च जोखिम वाले नवजात के रूप में लगातार निगरानी में रखा।
चौथा चरण: 27 अगस्त की सुबह अचानक बिगड़ी स्थिति
इलाज के दौरान 27 अगस्त 2026 की सुबह बच्चे की स्थिति में अचानक बदलाव आया।
उसकी blood oxygen saturation अचानक गिरने लगी। नवजात की पहले से मौजूद श्वसन संबंधी समस्या को देखते हुए चिकित्सकों ने इस परिवर्तन को गंभीरता से लिया।
तत्काल clinical examination किया गया। चिकित्सकों को किसी नई जटिलता की आशंका हुई। बिना समय गंवाए repeat chest X-ray कराने का निर्णय लिया गया।
जांच के परिणाम ने स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट कर दिया।
पांचवां चरण: दाहिनी ओर pneumothorax की पहचान
Repeat chest X-ray में बच्चे के दाहिने हिस्से में pneumothorax की स्थिति दिखाई दी।
Pneumothorax ऐसी स्थिति है जिसमें फेफड़े और छाती की दीवार के बीच मौजूद pleural space में हवा जमा हो जाती है। इससे फेफड़े के सामान्य रूप से फैलने में बाधा आ सकती है और मरीज की सांस लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
एक अत्यंत छोटे और समय से पहले जन्मे नवजात में ऐसी स्थिति को आपातकालीन चिकित्सा की आवश्यकता वाली समस्या माना जाता है। बच्चे की oxygen saturation में गिरावट और उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सा टीम ने तत्काल कार्रवाई करने का निर्णय लिया।
छठा चरण: Needle Aspiration से निकाली गई हवा
Pneumothorax की पहचान के बाद चिकित्सा टीम ने तुरंत needle aspiration की प्रक्रिया की।
इस प्रक्रिया के माध्यम से pleural cavity में जमा हवा को बाहर निकालने का प्रयास किया गया। चिकित्सकों ने उल्लेखनीय मात्रा में हवा निकालने में सफलता प्राप्त की।
हवा निकलने के बाद बच्चे की स्थिति में कुछ सुधार दिखाई दिया। हालांकि, यह सुधार पूरी तरह स्थायी नहीं था।
बच्चे की oxygen saturation में अभी भी उतार-चढ़ाव बना रहा। इसके बाद दोबारा chest X-ray किया गया।
जांच में pneumothorax के केवल आंशिक रूप से ठीक होने के संकेत मिले। इसका अर्थ था कि समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई थी और आगे के तत्काल उपचार की आवश्यकता बनी हुई थी।
सातवां चरण: ICD Tube की आवश्यकता महसूस हुई
बच्चे की गंभीर स्थिति और लगातार बने हुए air leak को देखते हुए चिकित्सकों ने तय किया कि केवल needle aspiration पर्याप्त नहीं होगी।
Pleural space में हवा को लगातार बाहर निकालने के लिए intercostal drainage यानी ICD tube की आवश्यकता महसूस हुई।
इस निर्णय का उद्देश्य बच्चे की छाती में जमा हवा को लगातार बाहर निकालना और फेफड़े को बेहतर तरीके से फैलने में सहायता देना था।
समय से पहले जन्मे और गंभीर रूप से बीमार नवजात में किसी भी प्रक्रिया के दौरान अत्यधिक सावधानी आवश्यक होती है। इसलिए चिकित्सा टीम ने उपलब्ध परिस्थितियों और बच्चे की स्थिति को ध्यान में रखते हुए तुरंत आगे की योजना तैयार की।
आठवां चरण: आपातकाल में बुलाए गए सर्जन
ICD procedure के लिए अस्पताल के सर्जन डॉ. जाविद वी. सिद्दीकी को तत्काल बुलाया गया।
बच्चा उस समय गंभीर अवस्था में NICU में भर्ती था। उसे किसी दूसरे स्थान पर ले जाने से अतिरिक्त जोखिम पैदा हो सकता था। इसलिए चिकित्सकों ने निर्णय लिया कि आवश्यक प्रक्रिया NICU के bedside पर ही की जाए।
पेडियाट्रिक्स विभाग के चिकित्सकों की मौजूदगी में और प्रोफेसर (डॉ.) अशोक कुमार दत्ता की सलाह के अनुसार आपातकालीन प्रक्रिया की तैयारी की गई।
इस पूरे समय बच्चे की निगरानी जारी रही और उसे आवश्यक respiratory support दिया जाता रहा।
नौवां चरण: NICU में ही सफलतापूर्वक हुआ Intercostal Drainage
27 अगस्त 2026 को शाम लगभग 5 बजे बच्चे के लिए intercostal drainage procedure किया गया।
डॉ. जाविद वी. सिद्दीकी ने NICU के bedside पर यह आपातकालीन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की।
बच्चे को गंभीर स्थिति में बाहर स्थानांतरित करने के बजाय NICU में ही प्रक्रिया करने का निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि वहां श्वसन संबंधी सहायता और निरंतर निगरानी पहले से उपलब्ध थी।
ICD tube लगाए जाने के बाद pleural space से हवा को लगातार बाहर निकालने की व्यवस्था हो गई। चिकित्सा टीम ने बच्चे की श्वसन स्थिति और oxygen saturation की लगातार निगरानी जारी रखी।
दसवां चरण: आपातकालीन प्रक्रिया के बाद दिखा सुधार
ICD procedure के बाद बच्चे की respiratory distress में उल्लेखनीय कमी देखी गई।
यह चिकित्सकों और परिवार के लिए एक सकारात्मक संकेत था। हालांकि बच्चा अभी भी पूरी तरह खतरे से बाहर नहीं था, लेकिन आपातकालीन हस्तक्षेप के बाद उसकी स्थिति में सुधार दिखाई दिया।
Drainage tube को अपनी जगह पर रखा गया और नवजात को NICU में गहन चिकित्सा के अंतर्गत रखा गया।
27 अगस्त की रात लगभग 9 बजे तक प्राप्त जानकारी के अनुसार, बच्चा उपचार के प्रति उत्साहजनक प्रतिक्रिया दे रहा था और ongoing respiratory support के साथ उसके रक्त में oxygen saturation लगभग 100 प्रतिशत के करीब बनी हुई थी।
ग्यारहवां चरण: उपचार अभी भी जारी
ऑक्सीजन के स्तर में सुधार के बावजूद नवजात को अभी भी गंभीर मरीज के रूप में निगरानी में रखा गया है।
वर्तमान में उसे NICU में लगातार intensive care प्रदान की जा रही है। उपचार में आवश्यक antibiotics, intravenous fluids, respiratory support और continuous monitoring शामिल हैं।
चिकित्सक बच्चे के श्वसन तंत्र की स्थिति, ऑक्सीजन स्तर और समग्र स्वास्थ्य पर लगातार नजर रख रहे हैं।
ICD tube भी फिलहाल अपनी जगह पर है। आने वाले समय में बच्चे की स्थिति और जांच के परिणामों के आधार पर चिकित्सक आगे की उपचार रणनीति तय करेंगे।
बारहवां चरण: परिवार को लगातार दी गई जानकारी
बच्चे की गंभीर स्थिति के दौरान उसके माता-पिता को हर महत्वपूर्ण चरण की जानकारी दी गई।
चिकित्सकों ने बच्चे की स्थिति, विभिन्न जांचों के परिणाम और उपचार के विकल्पों के बारे में परिवार को समझाया तथा आवश्यक counselling प्रदान की।
ऐसी आपातकालीन परिस्थितियों में परिवार के सदस्यों के लिए स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो सकती है। इसलिए चिकित्सा टीम ने उपचार के साथ-साथ परिवार को बच्चे की वर्तमान स्थिति के बारे में लगातार जानकारी देने पर भी ध्यान दिया।
परिवार को यह भी बताया गया कि आपातकालीन प्रक्रिया के बाद बच्चे में सुधार दिखाई दे रहा है, लेकिन उसे अभी लगातार चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता है।
तेरहवां चरण: NICU टीम की तत्परता बनी महत्वपूर्ण कड़ी
इस पूरे मामले में समय पर पहचान और तत्काल चिकित्सा हस्तक्षेप महत्वपूर्ण रहा।
जन्म के तुरंत बाद respiratory distress की पहचान से लेकर oxygen support, CPAP, chest X-ray, antibiotics और intravenous fluids तक उपचार आगे बढ़ा। इसके बाद जब oxygen saturation अचानक कम हुआ, तब repeat imaging के माध्यम से pneumothorax की पहचान की गई।
Pneumothorax सामने आने के बाद पहले needle aspiration की गई। इसके बावजूद जब समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई और oxygen saturation में उतार-चढ़ाव जारी रहा, तब ICD tube लगाने का निर्णय लिया गया।
इस पूरी प्रक्रिया में पेडियाट्रिक्स टीम, NICU स्टाफ और सर्जिकल टीम के बीच समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
चौदहवां चरण: समय से पहले जन्मे बच्चों के लिए विशेष देखभाल जरूरी
इस मामले ने एक बार फिर यह दिखाया कि समय से पहले जन्म लेने वाले नवजातों को जन्म के बाद विशेष चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता हो सकती है।
34 सप्ताह में जन्मे बच्चे के लिए सांस संबंधी समस्या एक गंभीर चुनौती बन सकती है। ऐसे बच्चों को जन्म के बाद respiratory support, संक्रमण की निगरानी और लगातार clinical observation की आवश्यकता पड़ सकती है।
इस नवजात के मामले में भी जन्म के कुछ ही मिनटों बाद सांस लेने में कठिनाई सामने आई। बाद में स्थिति में कई बार बदलाव आया और अंततः pneumothorax जैसी गंभीर जटिलता सामने आई।
इसलिए NICU जैसी सुविधा और प्रशिक्षित चिकित्सा टीम की उपलब्धता ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
पंद्रहवां चरण: फिलहाल स्थिति पर रखी जा रही है कड़ी नजर
27 अगस्त की रात तक नवजात की स्थिति में उत्साहजनक सुधार देखने को मिला है। Emergency ICD procedure के बाद respiratory distress कम हुआ और respiratory support के साथ oxygen saturation लगभग 100 प्रतिशत के करीब बनाए रखने में सफलता मिली।
लेकिन चिकित्सकों ने अभी सावधानी बरतना जारी रखा है। बच्चा समय से पहले पैदा हुआ है और हाल ही में गंभीर श्वसन संबंधी जटिलता से गुजरा है। इसलिए उसकी स्थिति में किसी भी बदलाव का तत्काल मूल्यांकन आवश्यक है।
NICU टीम बच्चे की लगातार निगरानी कर रही है और आवश्यक उपचार जारी है।
संकट के बीच उम्मीद की किरण
सुष्मिता दास के 34 सप्ताह में जन्मे नवजात पुत्र के लिए 25 अगस्त से 27 अगस्त तक का समय बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। जन्म के कुछ ही मिनट बाद respiratory distress से शुरू हुई समस्या ने धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लिया।
ऑक्सीजन सपोर्ट और CPAP के बाद chest X-ray में निमोनिया के अनुरूप संकेत सामने आए। उपचार के दौरान 27 अगस्त की सुबह अचानक oxygen saturation गिरने पर चिकित्सकों ने तत्काल repeat chest X-ray कराया। इसमें दाहिनी ओर pneumothorax की पहचान हुई।
आपातकालीन स्थिति में चिकित्सा टीम ने पहले needle aspiration के माध्यम से जमा हवा बाहर निकाली। कुछ सुधार होने के बावजूद pneumothorax पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। बच्चे की गंभीर स्थिति और persistent air leak को देखते हुए ICD tube लगाने का निर्णय लिया गया।
बच्चे को स्थानांतरित करने के जोखिम को देखते हुए यह प्रक्रिया NICU के bedside पर ही की गई। पेडियाट्रिक्स विभाग के चिकित्सकों की मौजूदगी और प्रोफेसर (डॉ.) अशोक कुमार दत्ता की सलाह के बीच अस्पताल के सर्जन डॉ. जाविद वी. सिद्दीकी ने 27 अगस्त की शाम लगभग 5 बजे intercostal drainage procedure सफलतापूर्वक पूरा किया।
इसके बाद नवजात की respiratory distress में उल्लेखनीय कमी आई। रात लगभग 9 बजे तक उसके oxygen saturation में उत्साहजनक सुधार दर्ज किया गया और ongoing respiratory support के साथ यह लगभग 100 प्रतिशत के करीब बनी हुई थी।
फिर भी चिकित्सकीय टीम का रुख सावधानीपूर्ण है। बच्चा अभी भी गंभीर स्थिति में NICU में भर्ती है और उसे antibiotics, intravenous fluids, respiratory support तथा निरंतर monitoring सहित गहन चिकित्सा दी जा रही है।
इस कठिन परिस्थिति में समय पर जटिलता की पहचान, तत्काल निर्णय, NICU में उपलब्ध श्वसन सहायता और विभिन्न विभागों के चिकित्सकों के समन्वित प्रयास ने उपचार को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
फिलहाल सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि नवजात उपचार का इसी तरह सकारात्मक जवाब देता रहे और आने वाले दिनों में उसकी शारीरिक स्थिति में लगातार सुधार हो। चिकित्सा टीम बच्चे की recovery को लेकर सावधानीपूर्वक आशावादी है और उसके स्वस्थ होने तक गहन निगरानी एवं उपचार जारी रहेगा।
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