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Shantiniketan Medical College & Hospital:मेडिकल कॉलेज में 14 मरीजों का बोन मैरो प्रत्यारोपण!!!

Shantiniketan Medical College & Hospital:बच्चों की बेफिक्र मुस्कान और खिलखिलाती हुई हंसी किसी भी परिवार के लिए दुनिया की सबसे खूबसूरत दौलत होती है। हालांकि, जो परिवार ‘मेजर थैलेसीमिया’ जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी से जूझ रहे हैं, उनके लिए हर उगता हुआ दिन दर्द, अनिश्चितता और आर्थिक संघर्ष की एक नई दास्तान लेकर आता है। हर कुछ हफ्तों में खून चढ़ाने (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) की विवशता, महंगे इलाज की लाचारी और बच्चे के अनिश्चित भविष्य का डर उनके जीवन का स्थाई हिस्सा बन जाता है।

परंतु, पश्चिम बंगाल के बोलपुर स्थित शांतिनिकेतन मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SMC&H) ने इन दुःखों के बीच आशा की एक ऐतिहासिक किरण बिखेरी है। कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी रिसर्च सेंटर के सहयोग से, अस्पताल ने मेजर थैलेसीमिया से पीड़ित 14 बच्चों और किशोर-किशोरियों को नया जीवन देने की एक अनुकरणीय पहल शुरू की है।

बिना किसी आर्थिक बोझ के होगा ‘बोन मैरो ट्रांसप्लांट’

इस मानवीय मिशन के तहत सभी 14 थैलेसीमिया ग्रस्त मरीजों का बोन मैरो प्रत्यारोपण (Bone Marrow Transplant) पूरी तरह निःशुल्क किया जाएगा।

कुल अनुमानित लागत: लगभग ₹7 करोड़

मरीजों पर वित्तीय भार: शून्य (0%)

सहयोगी संस्थान: शांतिनिकेतन मेडिकल कॉलेज एवं कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी रिसर्च सेंटर

इस वृहद स्वास्थ्य पहल की संपूर्ण लागत को आयोजकों द्वारा स्वयं वहन किया जाएगा, जिससे पीड़ित परिवारों को एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ेगा।

100% HLA जीन मैच: सफलता की ओर बड़ा कदम

गौरतलब है कि इसी वर्ष अप्रैल महीने में शांतिनिकेतन मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक विशेष थैलेसीमिया स्क्रीनिंग और मूल्यांकन शिविर आयोजित किया गया था। इस शिविर में अत्याधुनिक पैथोलॉजिकल परीक्षणों और डॉक्टरी जांच के बाद इन 14 मरीजों का चयन किया गया।

चिकित्सकों के अनुसार, चयनित सभी 14 मरीजों में 100 प्रतिशत एचएलए (HLA – Human Leukocyte Antigen) जीन मैच पाया गया है। बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सफलता दर को अधिकतम करने और रिजेक्शन के जोखिम को समाप्त करने के लिए 100% HLA मैच होना चिकित्सा विज्ञान में सबसे महत्वपूर्ण कारक माना जाता है।

जीवनदान पाने वाले 14 योद्धा:

मंगलदीप वैद्य

अनिमेष करण

रिया खातून

तानवी सुल्ताना

सुल्ताना परवीन

मोहम्मद इम्तियाज आलम

सुमाईया खातून

मिरजानु खातून

अनंत रानू

रेहान शेख

सैयद अब्दुल्ला सिद्दीकी

सुमन मुर्मू

मोहम्मद बरकतुल्लाह

अरित्र दलुई

 

शांतिनिकेतन मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के निदेशक प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार दत्त ने इस संदर्भ में कहा:

पैसे की कमी से कोई जान न गंवाए,मेजर थैलेसीमिया से स्थायी मुक्ति पाने का सबसे प्रभावी तरीका बोन मैरो ट्रांसप्लांट ही है। लेकिन इसकी अत्यधिक लागत के कारण अधिकांश साधारण और मध्यमवर्गीय परिवार इस इलाज का सपना भी नहीं देख पाते। हमारा मुख्य ध्येय यही है कि धन का अभाव किसी बच्चे के जीवन की डोर टूटने की वजह न बने। 100% HLA मैच मिलने से इन बच्चों के पूरी तरह ठीक होने की संभावनाएं बेहद उज्ज्वल हैं।”

चिकित्सा नहीं, यह है सेवा का अनुपम उदाहरण

यह कदम केवल 14 मरीजों का इलाज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 14 परिवारों के वर्षों पुराने मानसिक और आर्थिक कष्टों को खत्म करने की एक दृढ प्रतिबद्धता है। जब चिकित्सा क्षेत्र महज एक व्यवसाय न रहकर जनसेवा और संवेदनशीलता का माध्यम बनता है, तब समाज में ऐसे ही सकारात्मक बदलाव जन्म लेते हैं। शांतिनिकेतन मेडिकल कॉलेज की इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक चिकित्सा की असली ताकत तकनीक से ज्यादा ‘मानवता और सहानुभूति’ में निहित है।

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